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ओडिशा ट्रेन हादसा: ड्राइवर बेटे के इंतजार में 80 साल का बाप, बोला- मिलने की नहीं इजाजत, पता नहीं कैसे है लाल?

ओडिशा के बालासोर जिले में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे ने 275 लोगों को मौत की नींद सुला दिया। वहीं, 1000 से ज्यादा जख्मी हुए थे। हादसे को बीते 16 दिन बीत चुके हैं, लेकिन आज भी लोगों की आंखों के आगे खौफनाक मंजर छाया हुआ है।

Odisha Train Accident: ओडिशा के बालासोर जिले में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे को बीते 16 दिन हो चुके हैं। लेकिन, आज भी उस हादसे की गूंज और दर्दनाक मंजर कोई भूला नहीं सका है। सभी के जहन में सवाल है कि क्या ट्रेन चालक गुणानिधि मोहंती बहुत तेज चल रहा था?

वहीं, ट्रेन चालक के परिवार का कहना है कि हादसे की वजह उन्हें नहीं मालूम। लेकिन, गली-मोहल्लों और रिश्तेदारों में सभी उसके बेटे को गुनहगार मानते हैं। फुसफुसाते हैं। हम आज भी बेटे गुणानिधि मोहंती से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। अब तक बेटे से मुलाकात न हो सकी है।

Balasore train accident

ट्रेन के चालक गुणानिधि मोहंती के पिता पूर्व फौजी बिष्णु चरण मोहंती(80) का कहना है कि गांव में हर कोई सोचता है कि दुर्घटना के लिए मेरा बेटा जिम्मेदार है। लेकिन, वह पिछले 27 सालों से ट्रेन चला रहे हैं और उन्होंने कभी गलती नहीं की थी। मुझे कैसे पता चलेगा कि उस शाम क्या हुआ था? मैंने अपने बेटे से बात भी नहीं की है। मैं केवल उनके घर आने का इंतजार कर रहा हूं।

हादसे के दो दिन बाद पत्नी की हुई थी मुलाकात

ट्रेन हादसे में हुए घायलों में चालक गुणानिधि भी शामिल था। उसे भुवनेश्वर के एएमआरआई अस्पताल में भर्ती कराया गया। ट्रेन चालक गुणानिधि की तीन पसलियां टूटी और सिर में भी गंभीर चोटें आईं। दुर्घटना के दो दिन बाद, गुणानिधि के छोटे भाई रंजीत मोहंती अपने भाई से मिलने अस्पताल गए। उनकी बातचीत कुछ मिनट के लिए ही हो सकी।

छोटे भाई रंजीत मोहंती के मुताबिक, आईसीयू में किसी भी मोबाइल फोन की अनुमति नहीं थी। डॉक्टरों ने बताया था कि हादसे में गुणानिधि के सीने के अंदर खून जमा हो गया था। वह गहरे दर्द में थे और बोल नहीं पा रहे थे। हालांकि, मेरी भाभी वहां थीं, लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि ज्यादा देर मुलाकात नहीं हुई। उसी दिन गुणानिधि के बड़े भाई संजय मोहंती (पेशे से वकील) भी पहुंचे थे। लेकिन, मुलाकात नहीं हो सकी थी।

अस्पताल से छुट्टी के बाद से भाई लापता

ईस्ट कोस्ट रेलवे के चिकित्सा विभाग में कार्यरत एक डॉक्टर ने 4 दिन पहले गुणानिधि को अस्पताल से छुट्टी दे दी थी। लेकिन, उसके पिता और भाई अब भी कहते हैं कि उन्हें नहीं पता कि वह कहां है। छोटे भाई रंजीत मोहंती ने बताया कि किसी ने हमें मेरे भाई के बारे में कुछ नहीं बताया। मुझे लगता है कि वह अभी भी अस्पताल में है।

मालगाड़ी चालक में हुई थी भर्ती, फिर पैसेंजर ट्रेन का मिला जिम्मा

गुणानिधि के बड़े भाई संजय मोहंती ने कहा कि उन्हें यकीन है कि हादसे में उनके भाई की कोई भूमिका नहीं थी। भाई गुणानिधि की 1996 में एक मालगाड़ी चालक के रूप भर्ती हुई थी। कुछ साल पहले यात्री ट्रेनों को चलाना शुरू किया। सभी को लगता है कि हादसा मेरे भाई की गलती से हुआ, जबकि सच तो यह है कि ट्रेन किस ट्रैक पर चलेगी लोको पायलट का थोड़ा कंट्रोल होता है। यह कुछ ऐसा है जो वह हमें अक्सर बताया करते थे। यह ऑन-ड्यूटी स्टेशन मास्टर का कर्तव्य है, जो किसी विशेष ट्रेन को उस लाइन पर ट्रेवल करने की इजाजत देता है।

हादसे में 275 की मौत

आपको बता दें कि बीती 2 जून 2023 की शाम 7 बजकर 10 मिनट बालासोर जिले में बहानगा बाजार स्टेशन के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस आउटर पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। हादसे में हावड़ा से चेन्नई जा रही कोरोमंडल एक्सप्रेस के 21 से ज्यादा डिब्‍बे पटरी से उतर गए। इंजन मालगाड़ी पर चढ़ गया। उधर, तीसरे ट्रैक से गुजर रही बेंगलुरु-हावड़ा एक्सप्रेस से टकरा गई। हादसे में 275 लोगों की जान चली गई। वहीं, 1000 से ज्यादा जख्मी हुए। यह ट्रेन हादसा आजादी के बाद सबसे भीषण ट्रेन हादसों में से एक था।

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