चमत्कार: 1999 में लापता शख्‍स अचानक लौटा घर, साइक्‍लोन में लापता होने के बाद मान लिया गया था मृत

चमत्कार: 1999 में लापता शख्‍स अचानक लौटा घर, साइक्‍लोन में लापता होने के बाद मान लिया गया था मृत

Odisha Man missing in 1999 Suddenly returns Home: ओडिशा का परिवार जो अपने घर के मुखिया को दो दशक पहले मरा मान चुका था, और उनके गम में सालों से आंसू बहा रहा था वो ही शख्‍स अचानक से अपने घर लौट आया। पिता को जिंदा को देखकर जहां उनके बेटे खुशी में उनके गले लगकर रोने लगे वहीं पूरा गांव सालों पहले मरे हुए आदमी को देखकर स्‍तब्ध थे। ओडिशा में 1999 में आया वो ही सुपर साइक्‍लोन था जिसमें शहर के शहर तबाह हो गए थे। हर तरफ मातम छाया हुआ था।

1999 के सुपर साइक्‍लोन में तबाह हो गए थे कई परिवार

1999 के सुपर साइक्‍लोन में तबाह हो गए थे कई परिवार

दरअसल, ये शख्‍स ओडिशा में 1999 में आए सुपर चक्रवात में लापता हो गया था। ये वो ही साइक्‍लोन था जिसने ओडिशा के 14 जिलों को तबाह कर दिया था। उस चक्रवात में लगभग 10 हजार लोगों की मौत हो गई थी। 36 घंटे तब आए लंबे प्रलयकारी ज्वारीय चक्रवात में सैकड़ों लोग जो इस चक्रमवात में समा गए थे या गायब हो गए जो कभी भी समुद्र से वापस नहीं आए। कई परिवारों में मातम छा गया था। ओडिशा का ये परिवार उन्‍हीं परिवारों में से एक था जिस घर का मुखिया इस तूफान की भेट चढ़ गया था।

20 साल पहले लापता अस्सी साल का बुजुर्ग अचानक जिंदा हो गया

20 साल पहले लापता अस्सी साल का बुजुर्ग अचानक जिंदा हो गया

ओडिशा के पुरी का परिवार जो अपने पिता बराल के वापस मिलने का सालों तक इंतजार करता रहा और पूजा-पाठ करता रहा लेकिन जब वापस नहीं आए तो उन्‍हें मृत मान लिया था वो अस्सी साल का बुजुर्ग अभी-अभी जिंदा हो गया है। इनका नाम कृतिचंद्र बराल है जो भयंकर तूफान में खो गए थे।

चक्रवात में खोने के बाद अपनी याददाश्त खो दी थी, इस शख्‍स ने की मदद

चक्रवात में खोने के बाद अपनी याददाश्त खो दी थी, इस शख्‍स ने की मदद

पुरी के बराल नाम के इस शख्‍स ने चक्रवात में खोने के बाद अपनी याददाश्त खो दी और विशाखापत्तनम के गीले फुटपाथों पर भटक रहा था। ए.जे. स्टालिन, जो उस समय ग्रेटर विशाखापत्तनम के नगरसेवक थे, उन्‍हें इस व्यक्ति पर दया आई और हर दिन उसको भोजन देने पहुंच जाते थे। ये सालों तक चला लेकिन एक दोपहर पार्षद स्टालिन ने हमेशा की तरह अपनी कार रोकी और हॉर्न भी बजाया, लेकिन वह आदमी नहीं आया। स्टालिन बाहर निकला और खोजबीन के बाद वह आदमी मिला। वह बीमार थे और चलने-फिरने में असमर्थ थे। यह 2012 की बात है।

स्टालिन ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी (MOC) करवा दिया भर्ती

स्टालिन ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी (MOC) करवा दिया भर्ती

जिसके बाद स्टालिन ने मिशनरीज ऑफ चैरिटी (MOC) से संपर्क किया और उनसे उस व्यक्ति की देखभाल करने के लिए छोड़ दिया जहां उसकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार हुआ। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी याददाश्त वापस नहीं आ सकी। हालांकि, वह व्यक्ति कभी-कभी आंध्र प्रदेश के एक शहर और जिले के नाम श्रीकाकुलम शब्द का उच्चारण करता था।

जानिए कैसे घर का पता चला

जानिए कैसे घर का पता चला

बराल की जब हालत सुधरी तो एमओसी ने उसे श्रीकाकुलम के पास एक केंद्र में ट्रांसफर कर दिया। जब वे मिशनरियों के साथ गांवों में जाते थे तो वह उनके साथ जाते थे। एमओसी को उम्मीद थी कि वहां कोई उसे पहचान लेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं कुछ दिन बाद MOC से एक कॉल आया वे चाहते थे कि इस आदमी के परिवार का पता लगाने की कोशिश की जाए क्‍योंकि उनका नाम भी नहीं जानते थे। इसके बाद नेटवर्क में व्यापक खोज के बाद, हमने आखिरकार बराल परिवार को पतिग्राम, बामनला, पुरी में ढूंढ लिया।

खोए पिता को पाक खुशी से झूम उठे बेटे

खोए पिता को पाक खुशी से झूम उठे बेटे

पश्चिम बंगाल रेडियो क्लब (डब्ल्यूबीआरसी) के सचिव अंबरीश नाग बिस्वास ने बताया कि बराल के तीन बेटे हैं। इनमें से एक की आंखों की रोशनी चली गई है। अपने पिता की तस्वीर देखकर बाकी दोनों बेटे हक्का-बक्का रह गए और फिर रोने लगे। बराल का परिवार एक संपन्न परिवार हैं और उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता चक्रवात के बाद लापता हो गए थे और उन्हें मृत मान लिया गया था। ऐसा माना जा रहा है कि बराल को चक्रवात के दौरान एक दर्दनाक अनुभव हुआ और उसकी याददाश्त चली गई। उन्होंने किसी तरह श्रीकाकुलम की यात्रा की और अभी भी नाम याद है। वहां से, वह विशाखापत्तनम में लावारिश की तरह घूमते रहे।

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