Odisha: ओडिशा में गजपति बन सकती है हॉट सीट, BJD ने लगाई पूरी ताकत
ओडिशा विधानसभा चुनाव में इस बार कुछ सीटों को कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। बीजू जनता दल इस बार गजपति में दो प्रमुख सीटों पर कब्जा करने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। परलाखेमुंडी और मोहना विधानसभा सीटों को फिर से हासिल करना चाहता है। दरअसल, इन सीटों पर पिछले चुनाव में बीजेडी हार गई थी। हालांकि इसके बावजूद बीजेडी का वोट प्रतिशत अधिक नहीं घटा था। ऐसे इस बार गजपति की सीटों पर बीजेडी से अन्य दलों का कड़ी टक्कर मिलने वाली है।
गजपति जिले की सीटों परलाखेमुंडी और मोहना में 2024 के चुनाव में कांटे की टक्कर देखने को मिल सकती है। दरअसल, सत्तारूढ़ बीजद रणनीतिक रूप से इन दो सीटों को फिर से हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

परलाखेमुंडी और मोहना में चुनावी समीकरण इस बार बीजेडी के पक्ष में होने का दावा किया जा रहा है। दरअसल, ये दावा इसलिए भी किया जा रहा है, क्योंकि बीजेडी के लोकसभा उम्मीदवारों ने दोनों क्षेत्रों में अधिक वोट हासिल किए थे। सीटें गंवाने के बाद भी इन सीटों पर वोट प्रतिशत के लिहाज से विशेष असर नहीं हुआ।
बीजेपी जिन सीटों पर मजबूती का दावा कर रही है, उसमें परलाखेमुंडी में परलाखेमुंडी नगर पालिका, काशीनगर और गुमा शामिल हैं। इन सीटों पर कंपा और तेलुगु समुदायों विशेष प्रभाव रखते हैं।
अतीत में कांग्रेस के प्रभुत्व वाले इस खंड पर 2019 में भाजपा ने कब्जा कर लिया था। हालांकि सेवानिवृत्त नौकरशाह और कांग्रेस नेता बिजय पटनायक, जो इस सीट पर नजर गड़ाए हुए हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इस खंड से सदस्यों का पलायन देखा जा रहा है।
वहीं दूसरी ओर मोहना सीट पर आर उदयगिरि, नुआगाड़ा और रायगढ़ा ब्लॉक शामिल हैं। वहीं इससे पहले, दिवंगत सूर्य नारायण पात्रो ने 1990 और 2004 के बीच लगातार चार बार जेडी और बीजेडी उम्मीदवार के रूप में दो-दो बार इस क्षेत्र से जीत हासिल की थी। हालांकि, पात्रों 2009 में गंजम के दिगपहांडी में चले गए और 2019 तक बने रहे। उसी वर्ष, कांग्रेस, बीजद और भाजपा के बीच त्रिकोणीय लड़ाई थी लेकिन कांग्रेस ने करीबी अंतर से जीत हासिल की।
में शामिल नहीं किया गया है।
वहीं बीजेडी के राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी किसी नये चेहरे को चुन सकती है। बीजद नेता और अध्यक्ष 5टी वीके पांडियन ने जिले के अपने दौरे के दौरान पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न योजनाओं के तहत आवंटित 200 करोड़ पर प्रकाश डाला है। इस फोकस का असर मतदाताओं पर पड़ सकता है।












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