ओडिशा: धर्मेंद्र प्रधान ने नवीन सरकार को दिया सख्त संदेश, बोले- STs के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ न करें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ओडिशा की नवीन सरकार को सख्त संदेश दिया है। उन्होंने वापस लिए गए जनजातीय भूमि हस्तांतरण विधेयक पर ओडिशा को चेतावनी देने की मांग की।
धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को पारित संविधान (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति) आदेश संशोधन विधेयक, 2024 पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान चेतावनी की मांग की।

उन्होंने कहा कि ओडिशा सरकार ने एक कैबिनेट फैसले के माध्यम से अधिनियम में छेड़छाड़ करके अनुसूचित जनजातियों की भूमि को हड़पने की कोशिश की। जिसे अनुच्छेद 244 (भूमि हस्तांतरण की रोकथाम) के तहत संरक्षित किया गया है। राज्य सरकार ने एसटी समुदाय की जमीन बेचने का फैसला किया था।
इस फैसले को लेकर आदिवासी समुदायों में नाराजगी थी। इसको लेकर काफी विरोध भी हुआ, जिसके बाद नवीन सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया। फैसले को वापस लेने के लिए ओडिशा सरकार को धन्यवाद देता हूं। वे सही वक्त पर एक बड़ी गलती से बच गए। लेकिन एक बार जब किसी ने खून का स्वाद चख लिया, तो वे निश्चित रूप से उस स्थान पर लौट आएंगे जहां यह उपलब्ध है।
इसलिए मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि जो लोग ओडिशा में संवैधानिक व्यवस्था से छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें दिल्ली से कड़ी चेतावनी दी जाए। न केवल ओडिशा, बल्कि दिल्ली को सभी राज्यों को चेतावनी देनी चाहिए कि वे भारत में कहीं भी अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ न करें।
उच्च सदन में उस समय आमने-सामने की स्थिति पैदा हो गई, जब राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने धर्मेंद्र प्रधान के बयान का जवाब देते हुए इसे ओडिशा कैबिनेट को कमजोर करने का प्रयास बताया।
उन्होंने कहा कि मंत्री प्रधान ने ओडिशा कैबिनेट पर विचार किया है जो राज्यों की परिषद के समान एक संवैधानिक प्राधिकरण है, क्योंकि यह संविधान से अपनी शक्ति प्राप्त करता है। इसलिए ओडिशा कैबिनेट को कमतर आंकना दुर्भाग्यपूर्ण है।












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