Odisha: ओ़डिशा की वो सीट जहां 'रानियों' का दबदबा, जानिए 2024 का राजनीतिक समीकरण
ओडिशा चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाली कुछ ऐसी सीटें हैं, जहां के कैंडिडेट्स का वर्चस्व सिर्फ उनके ही निर्वाचन क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बरहामपुर की गंजम सीट उन्हीं में से एक है, जहां राजघरानों का दबदबा अब भी कायम है। हालांकि समय के साथ शाही परिवार का वर्चस्व घटा। इसके बावजूद रानियां अब भी अपने समर्थकों के दिलों पर राज करती हैं।
राजघरानों के बहुओं का ओडिशा में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में पिछले कुछ दशकों से भीतर लगातार वर्चस्व देखा गया। खल्लीकोट और कविसूर्यनगर से दस बार विधायक रह चुकीं वी. सुगनना कुमारी देव, चिकिटी से छह बार की विधायक रहीं उषा देवी, धाराकोट की नंदिनी देवी। ये तीनों नाम किसी पहचान के मोहताज नहीं है। धाराकोट रियासत की रानी रही नंदिनी देवी सोरोदा और सनाखेमुंडी सीट से विधायक रह चुकी हैं।

तीनों शाही परिवार एमएलए का दबदबा अब भी कायम है। हालांकि उनकी जैसे-जैसे नेताओं की उम्र बढ़ती जा रही है, राजनितक समीकरण में भी बदलाव देखा जा रहा है। सुगनना कुमारी का कोई वारिस नहीं है, उषा देवी के बेटे श्रीरूप देव और नंदिनी की बेटी सुलख्याना गीतांजलि ने प्रत्यक्ष राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि नंदिनी देवी के पति किशोर चंद्र सिंहदेव बीजेपी नेता थे और उन्होंने भी 2009 में सनाखेमुंडी विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और हार गईं थीं। वह बीजद में चली गईं और 2014 में सनाखेमुंडी से विधायक चुनी गईं लेकिन 2019 में हार गईं। उनकी बेटी सुलख्याना आगे बढ़ीं और धाराकोटे ब्लॉक की अध्यक्ष चुनी गईं।
अब उन्हें आगामी चुनाव के लिए सनाखेमुंडी विधानसभा सीट पर बीजद उम्मीदवार के रूप में पेश किया जा रहा है और उन्हें विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों में देखा जा सकता है।












Click it and Unblock the Notifications