भुवनेश्वर में आदिवासी प्रदर्शनी की तैयारी पूरी, दिखेगी ग्रामीण संस्कृति की झलक
ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में होने वाले वार्षिक आदिवासी प्रदर्शनी की तैयारियां पूरी हो चुकी है। यह मेला 26 जनवरी से 5 फरवरी के बीच होगा। मेले में पारंपरिक आदिवासी स्टॉल, जनजातीय कला और शिल्फ खंड के 22 स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके साथ ही यहां 17 माइक्रो प्रोजेक्ट एरिया और अलग-अलग विभाग के भी स्टॉल लगेंगे।
मेला आम लोगों के लिए तोपहर 2.30 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा। बता दें कि वार्षिक आदिवासी मेला एससी, एसटी विकास, अल्पसंख्यक और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का एक अहम कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के जरिए राजधानी और आसपास के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करना है, जहां लोग आदिवासी जीवन, मानव विज्ञान को करीब से देख सके। उनके कृषि उत्पादों, लघु वन उपज और शिल्प सामग्री को खरीद सके।

इस मेले के जरिए आदिमंदिरवासी क्षेत्र के लोगों को अपना शिल्प, कला सामग्री आदि प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। इस मेले में आदिवासी नृत्य, आदिवासी भाषाओं में नाटक, महोत्सव आदि का भी मंचन किया जाता है। इसके साथ ही यहां भजन संध्या भी होती है। मेले का मुख्य आकर्षण यहां खास तौर पर आदिवासी गांव का डिस्प्ले होता है जिसे देखने के लिए लोग आते हैं। इस वर्ष इस मेले में कुटिया कंधा, संथल, पौड़ी भुइया, हिल खादिया और मांकिरिडा, जौनगा मुंडा, गदाबा, डोंगरिया कंधा, लाजिया साओरा, बोंडा और चुक्तिया भुंजिया की छोपड़ियां देखने को मिलेंगी।
मेले में 39 सांस्कृतिक समूह 26 जनवरी से लेकर 1 फरवरी तक सुंदर आदिवासी नृत्यों का मंचन करेंगे। साथ ही 30 जनवरी को भजन संध्या और 2 फरवरी को एससी/एसटी विकास विभाग सांस्कृतिक संघ द्वारा एक नाटक का आयोजन किया जाएगा। जब कि अलग समुदायों का आयोजन 3 से 5 फरवरी के बीच किया जाएगा।












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