ओट्स वाली मॉम उड़ा देंगी नरेंद्र मोदी की नींद
[अजय मोहन] खबरों के चक्कर में ऐसा उलझा कि भूल गया कि पत्नी ने भी कुछ मंगवाया था। घर पहुंचा तो पत्नी ने पूछा ओट्स लाये? ओह एकदम ध्यान से उतर गया- मैंने जवाब दिया। किचन से आवाज़ आयी- आपको बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता नहीं है, रोज-रोज दलिया और केला कबतक खायेगा बच्चा, ओट्स ले आते तो बच्चे को कम से कम कुछ पौष्टिक तत्व ही मिल जाते...
इस बात को करीब दो सप्ताह हो गये हैं, लेकिन इसी बीच मैंने वो चीज महसूस की, जिसे अब तक मैंने सिर्फ देखा पर ध्यान नहीं दिया। दोस्त-यार, रिश्तेदार, जिससे बात करो, वो ओट्स की बात कर रहा है। खास तौर से वो लोग जो अपने बच्चों के खाने के लिये जरूरत से ज्यादा कॉन्श्यस रहते हैं। फिर जब 1.3 अरब वाली आबादी के भारत देश पर नजरें दौड़ायीं आैर अध्ययन किया तो पता चला कि मेरी पत्नी जैसी देश भर में तमाम सारी ओट्स वाली मॉम हैं जो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नींद उड़ा सकती हैं, लेकिन सिर्फ तब-तक जबतक योजना चल नहीं पड़ती, उसके बाद जितना चैन पीएम मोदी को मिलेगा उसका अंदाजा अभी नहीं लगाया जा सकता है।
सरकार को हेलदी बना सकता है ओट्स
ओट्स वाली मॉम इसलिये क्योंकि ओट्स का कल्चर देश के शहरों तक ही सीमित है, जहां ज्यादातर बच्चे मां को मॉम कहकर पुकारते हैं। अफसोस पिछले 10 साल से शासन कर रही सरकार की नजर अगर भारत की मॉम पर गई होती, तो शायद कृषि क्षेत्र में नई क्रांति आ चुकी होती। क्योंकि पिछले 10 साल में जितनी कमाई ऑस्ट्रेलिया ने की है, उससे हीं ज्यादा कमाई देश के किसानों की हो सकती थी। और तो और अगर मोदी सरकार अभी भी ओट्स पर ठोस नीति बना ले, तो ओट्स के बदले ऑस्ट्रेलिया जाने वाला पैसा किसानों के घरों में उजाला कर सकता है।
खैर ज्यादा उलझाने से अच्छा है मैं आपको उस रिपोर्ट से रू-ब-रू कराऊं जो ऑस्ट्रेलिया सरकार ने तैयार की है। यह रिपोर्ट भारत में ओट्स के मार्केट और आगे आने वाले फ्यूचर पर तैयार की गई है, जिसे गवर्नमेंट ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के भारत में ट्रेड ऑफिस में तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत में 8,000 से 10,000 टन ओट्स की खपत है। बाजार में ओट्स की कीमतों को देखते हुए इस क्षेत्र का कुल व्यापार 136 करोड़ रुपए से ज्यादा है। यह 10 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और इससे ऑस्ट्रेलिया के किसानों को लाखों डॉलर की कमाई हो रही है।
स्लाइडर में ओट्स से जुड़ी वो बातें जो आप नहीं जानते और अगर मोदी सरकार फॉलो करे तोक्या-क्या संभव है जानने के लिये तस्वीरों के नीचे जरूर पढ़ें-

फैशन में आया ओट्स
पिछले दो-तीन वर्षों में भारत में ओट्स एक फैशन के रूप में उभरा है। यह फैशन 1.3 अरब की आबादी के एक बड़े हिस्से यानी शहरी आबादी में आया है, जिनकी संख्या करीब 330 मिलियन है।

तेज हुआ प्रचार प्रसार
टीवी पर महिलाओं और बच्चों से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान हर चौथा विज्ञापन ओट्स का होता है।

तले-भुने नाश्ते की छुट्टी
पहले जहां सुबह-सुबह पूड़ी, पराठे बनते थे, वहीं अब ओट्स दूध में भिगो कर खाये जाते हैं। यह हेलदी, टेस्टी होने के साथ-साथ टाइम बचाता है।

5 साल में 15 हजार टन तक बिकेगा ओट्स
बाजार के विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले पांच साल में भारत में ओट्स की बिक्री बढ़ कर 15 हजार टन तक पहुंच सकती है।

भारत में भी पैदा होता है ओट्स पर?
बाजार में बिकने वाला ओट्स ऑस्ट्रेलिया व अन्य देशों से आता है। जबकि भारत में पैदा होने वाला ओट्स कंपनियां कतई इस्तेमाल नहीं करती हैं। यहां जो ओट्स पैदा होते हैं, वो जानवरों को खिला दिया जाता है।

भारतीय ओट्स की खपत बैंगलोर, चेन्नई, मुंबई में सबसे ज्यादा
भारत में पैदा होने वाले ओट्स की खपत सबसे ज्यादा बैंगलोर, चेन्नई, मुंबई के रेस कोर्स में होती है, जहां ओट्स घोड़ों का आहार बनते हैं।

ओट्स पर नहीं लगती कस्टम ड्यूटी
जिन ओट्स के नाम पर निजी कंपनियां व विदेशी कंपनियां करोड़ों कमा रही हैं, उन पर भारत सरकार कस्टम व एक्साइज ड्यूटी नहीं लगाती है। जबकि सरकार को इससे भारी मुनाफा हो सकता है।

40 फीट के कंटेनर में आता है ओट्स
विदेशों से 40 फीट के कंटेनर में आता है और फिर यहां पर उसकी पैकेजिंग करके बेच दिया जाता है।

कितने में बिकता है
भारत में ओट्स की कीमत 100 से 150 रुपए प्रति किलो है।

क्या करे मोदी सरकार
ओट्स के बढ़ते व्यापार को देखते हुए मोदी सरकार को क्या करना चाहिये? यह पढ़ने के लिये आगे के स्लाइड देखें।

हिमालय की छोटी पहाड़ियों पर खेती
अगर भारत सरकार पहाड़ पर रहने वाले किसानों को ओट्स की खेती करने पर जोर दे, तो भारत को बाहर से ओट्स नहीं खरीदने पड़ेंगे।

कस्टम ड्यूटी लगायें
जिस तरह से इसका मार्केट बढ़ रहा है, उसे देखते हुए रेल किराया बढ़ाने के बजाये ओट्स पर कस्टम ड्यूटी लगा दे, क्योंकि ओट्स गरीबों के लिये नहीं अमीर तबके के लिये विदेश से आते हैं, जो बढ़ी हुई कीमत दे सकते हैं।

क्या होगा अगर भारत में पैदा हो ओट्स
अगर भारत में ओट्स की पैदावार पर जोर दिया जाये तो क्या होगा यह आगे की स्लाइड में पढ़ें।

बाजार में ओट्स की कीमत घट जायेगी
अगर भारत में ही पैदावार बढ़ा दी जाये, तो बाजार में बिकने वो ओट्स की कीमत आधी हो सकती है। यानी 75 रुपए प्रति किलो।

किसानों की कमाई
ओट्स की पैदावार करने वाले किसानों की कमाई दिन-दूनी रात चौगुनी हो सकती है, क्योंकि इसका ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास
कम कीमत में मिलने पर मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास परिवार भी इस पोष्टिक नाश्ते को खाने के बारे में सोचेंगे।

ओट्स से भारत सरकार को होगी भारी कमाई
कस्टम ड्यूटी लगाने पर विदेशी ब्रांड्स से राजस्व मिल सकता है। ये ब्रांड कभी भी भारतीय मार्केट को नहीं छोड़ेंगे क्यांकि यहां करोड़पतियों की भी कमी नहीं है।

नहीं कहेंगे... मैं यहां टुकड़ों पे जी रहा हूं
जी हां ओट्स का वो विज्ञापन आपको याद होगा जिसमें महिला गाती है- मैं यहां टुकड़ों पे जी रहा हूं... असल में यह गीत मो भारत के किसान गा रहे हैं। अगर मोदी सरकार ओट्स पर फोकस करे, तो भारत के किसानों को यह गीत नहीं गाना पड़ेगा।












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