JNU देशद्रोह मामला: केस चलाने की मंजूरी से पहले कानूनी सलाह ले रही है केजरीवाल सरकार
नई दिल्ली। जेएनयू देशद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा दायर चार्जशीट के मामले में केजरीवाल सरकार कानूनी सलाह ले रही है। सूत्रों के अनुसार, कन्हैया कुमार और अन्य के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने से पहले दिल्ली सरकार कानूनी सलाह ले रही है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में मंजूरी देने के लिए उनके पास कम से कम तीन महीने का वक्त है। दरअसल, जेएनयू मामले में 1200 पन्नों की दायर हुई चार्जशीट को लेकर कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि जब कानून विभाग की मंजूरी ही नहीं है, तो आपने आरोप पत्र कैसे दायर कर दिया?

सूत्रों के अनुसार, सरकार का कहना है कि दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आरोप पत्र दाखिल करने में 3 साल का वक्त लिया। सरकार को भी इस मामले में केस चलाने की मंजूरी पर फैसला लेने से पहले वक्त दिया जाना चाहिए। सरकार के पास नियमों के मुताबिक, तीन महीने का वक्त है। दिल्ली पुलिस ने जेएनयू के छात्रों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था और कोर्ट को बताया था कि दिल्ली सरकार से इसकी मंजूरी अभी नहीं मिली है।
साल 2016 के देशद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उमर खालिद सहित 10 लोगों के खिलाफ 1200 पन्नों का आरोप पत्र दाखिल किया था। पटियाला हाउस कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने 2016 जेएनयू देशद्रोह मामले में 124A 323, 465, 471,143, 149, 147, 120B सहित भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल किया है।
कन्हैया-उमर के अलावा 7 कश्मीरी छात्रों के नाम भी शामिल
जेएनयू देशद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा जिन लोगों के नाम चार्जशीट में दिए गए हैं उनमें- कन्हैया कुमार, उमर खालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य के अलावा अकीब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उमर गुल, रईस रसूल और बशीर भट के नाम शामिल हैं। इसके अलावा शेहला राशिद और सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता का नाम भी आरोप-पत्र में शामिल है।












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