लद्दाख में टेंशन कम करने के लिए एक्टिव होंगे NSA डोवाल, वाजपेयी की इस तरकीब से पीछे हटेगी चीन की सेना!
नई दिल्ली। भारत और चीन के बीच लद्दाख में जारी टकराव को दो माह पूरे हो चुके हैं। पांच मई को शुरू हुआ तनाव कोर कमांडर स्तर की तीन दौर वार्ता के बाद भी कम होता नजर नहीं आ रहा है। अब लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हालात सामान्य करने के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने उस तरीके को अपनाने का फैसला किया है जिसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी। सरकार अब स्पेशल रिप्रजेंटेटिव (एसआर) मंत्र को फिर से एक्टिव करने का मन बना चुकी है। इसकी शुरुआत वाजपेयी के कार्यकाल में बॉर्डर पर मुश्किल हालातों को सुलझाने के मकसद से ही की गई थी।
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पीएम मोदी देंगे डोवाल को जिम्मेदारी
एसआर तंत्र के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) को अजित डोवाल को बड़ा जिम्मा दिया जाएगा। डोवाल अपने चीनी समकक्ष के अलावा चीन के विदेश मंत्री वांग वाई से वार्ता कर सकते हैं। इस वार्ता का एकमात्र लक्ष्य डिएस्केलशन प्रक्रिया को शुरू करना और स्थिति को सामान्य करना होगा। माना जा रहा था कि पांच जुलाई को इंडियन आर्मी की तरफ से इस बात की जांच होनी थी कि सेनाएं पीछे हटी हैं या नहीं या फिर ढांचे को गिराया गया है या नहीं। सूत्रों की ओर से बताया गया है कि सेना की टीमों को कुछ बिंदुओं पर वैरीफिकेशन के लिए भेजा गया था जहां पर बल तैनात हैं और टकराव जारी है।

फिंगर 4 और फिंगर 8 पर चीनी सेनाएं
गलवान घाटी और कुछ और हिस्सों में मौसम पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं है। वहीं कुछ सीनियर ऑफिसर्स का कहना है कि यह प्रक्रिया काफी लंबी है और इसमें अभी वक्त लग सकता है। गृह मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि 10 दिनों की एक समयसीमा को तैयार किया गया है। इसे बनाते समय यह बात ध्यान में रखी गई है कि अगले तीन से पांच दिनों में क्या हासिल किया जा सकता है। पैंगोंग त्सो पर जिसमें फिंगर 4 और फिंगर 8 के बीच का इलाका भी शामिल हैं, वहां पर चीनी सेना ने अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है। यहां पर डिएस्केलशन की शुरुआत अभी होनी है। इसके अलावा देपासांग में हुआ निर्माण कार्य भी चिंता का विषय बना हुआ है।

साल 2017 में डोवाल ने किया हस्तक्षेप
विदेश मंत्री एस जयशंकर को भी एसआर मैकेनिज्म में शामिल किया गया है। चीनी मामलों के जानकारी जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग वाई से इस मसले पर बात की है। सूत्रों के मुताबिक मसला को जल्द से जल्द हल करना है तो फिर भारत सरकार को अपने उच्च स्तर पर चीन के साथ संपर्क करना होगा। चीन में स्टेट काउंसिलर का पद विदेश मंत्री से ज्यादा बड़ा होता है। लेकिन भारत में जयशंकर और डोवाल दोनों एक ही स्तर पर हैं और दोनों के पास कैबिनेट मंत्री का दर्जा है। साल 2017 में भी जब डोकलाम विवाद हुआ था तो चीन के स्टेट काउंसिलर यांग जेइछी स्पेशल रिप्रजेंटेटिव थे। वहीं वांग वाई उसके बाद स्टेट काउंसिलर बने और अब उनके पास साल 2017 की तुलना में कहीं ज्यादा ताकत है।

वाजपेयी ने की थी SR तंत्र की शुरुआत
साल 1998 में भारत ने जब परमाणु परीक्षण किया तो चीन काफी नाराज हो गया था। इसके बाद साल 2003 में तत्कालीन चीनी पीएम बेन जियाबाओ भारत की यात्रा पर आए। चीन ने भारत की तरफ से हुए न्यूक्लियर टेस्ट्स को खतरा करार दिया था। लेकिन जब जियाबाओ भारत की यात्रा पर आए थे तो वाजपेयी ने सीमा विवाद को सुलझाने के लिए स्पेशल रिप्रजेंटेटिव्स (एसआर) तंत्र की शुरुआत की। इसका मकसद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को सुलझाना था। इसके बाद से ही चीनी विशेषज्ञ मानने लगे थे कि वाजपेयी ने भारत और चीन के रिश्तों को नई दिशा देने वाले अहम शख्स थे।












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