NRC Draft: देश के पांचवें राष्‍ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद के परिवार के सदस्‍य भी ड्राफ्ट से बाहर

फखरुद्दीन अली अहमद, देश के पांचवें राष्‍ट्रपति थे और आपको जानकर हैरानी होगी कि इनके परिवार का नाम असम में हाल ही में जारी नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में नहीं है। इनके परिवार के सदस्‍य भी उन 40 लाख लोगों में शामिल हैं जिन्‍हें दूसरे ड्राफ्ट में जगह नहीं मिली है।

नई दिल्‍ली। फखरुद्दीन अली अहमद, देश के पांचवें राष्‍ट्रपति थे और आपको जानकर हैरानी होगी कि इनके परिवार का नाम असम में हाल ही में जारी नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) में नहीं है। इनके परिवार के सदस्‍य भी उन 40 लाख लोगों में शामिल हैं जिन्‍हें दूसरे ड्राफ्ट में जगह नहीं मिली है। फखरुद्दीन अली अहमद के भतीजे जियाउद्दीन अली अहमद का नाम इस लिस्‍ट से गायब है। फखरुद्दीन ने साल 1974 में राष्‍ट्रपति पद की शपथ ली थी और साल 1977 में जब वह पद पर थे, तो उनका निधन हो गया था। आपको बता दें कि जब से यह लिस्‍ट जारी हुई है तब से ही पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। ममता ने पूर्व राष्‍ट्रपति के परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे साबित होता है कि कैसे असम में बसे भारत के असली नागरिकों को भी लिस्‍ट से बाहर रखा गया है। ये भी पढ़ें-भारत में बसे गैर-कानूनी बांग्‍लादेशी नागरिक क्‍यों हैं खतरे की घंटी?

परेशान हैं परिवार वाले

परेशान हैं परिवार वाले

फखरुद्दीन के भतीजे जियाउद्दीन ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हमारे नाम एनआरसी में नहीं हैं क्‍योंकि मेरे पिता का नाम लीगेसी डाटा डॉक्‍यूमेंट में नहीं था। मैं अब अपने चाचा के परिवार से संपर्क करूंगा।' लीगेसी डाटा ऐसे डॉक्‍यूमेंट्स हैं जिनसे साफ होता है क‍ि आवेदनकर्ता के माता-पिता साल 1951 से भारत में ही रह रहे हैं, जब आखिरी लिस्‍ट तैयार हुई थी। विपक्ष का आरोप है कि सरकार भारतीय मुसलमानों को गैर-कानूनी प्रवासियों की आड़ में निशाना बनाने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मैं इस बात को देखकर हैरान हूं कि हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति के परिवार का नाम भी एनआरसी की असम लिस्‍ट में नही है।'

सिविल वॉर की चेतावनी

सिविल वॉर की चेतावनी

उनके मुताबिक ऐसे कितने ही लोग हैं जिनके नाम लिस्‍ट में नहीं हैं। ममता इस मुद्दे पर सरकार को सिविल वॉर की चेतावनी दे चुकी हैं। वहीं सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का भरोसा दिलाया है कि यह सिर्फ एक ड्राफ्ट है। जिनके नाम दूसरी लिस्‍ट में नहीं हैं उनके खिलाफ अभी कोई भी एक्‍शन नहीं लिया जाएगा। साथ ही जिन लोगों के नाम नहीं है, उन्‍हें अपनी नागरिकता साबित करने के लिए पूरा मौका दिया जाएगा। सात अगस्‍त को इस ड्राफ्ट लिस्‍ट को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। जो लोग इस लिस्‍ट में नहीं हैं वे 30 अगस्‍त से 28 सितंबर के बीच नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।

गायब है रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर का नाम

गायब है रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर का नाम

इस लिस्ट इंडियन आर्मी के एक रिटायर्ड ऑफिसर का नाम भी गायब है। सेना के पूर्व ऑफिसर मोहम्मद अजमल हक ने देश के लिए 30 साल तक सेवा की है और सितंबर 2016 में वे जेसीओ पद से रिटायर हुए थे। अजमल, गुवाहटी से 50 किमी दूर चायगांव में अपने परिवार के साथ रहते हैं। इंग्लिश मैगजीन 'आउटलुक' से बात करते हुए हक ने कहा कि सभी डॉक्यूमेंट जमा कराने के बाद भी उनका नाम एनआरसी की लिस्ट में नहीं है। 50 वर्षीय हक के मुताबिक लिस्‍ट से उनके बेटे और बेटी का नाम भी गायब है। इसके बाद उन्हें असम में एक अवैध घुसपैठिए के रूप में देखा जा रहा है।

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