अब गहरे समुद्र में भारत ने शुरू किया डीप ओसियन मिशन, आएगा 4000 करोड़ का खर्च
नई दिल्ली। भारत सरकार ने गहरे समुद्र में खनिज, समुद्री जीवन और ऊर्जा का पता लगाने के लिए डीप ओसियन मिशन शुरू करने जा रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सचिव एम राजीवन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इस अभियान के तहत समुद्री पानी के नीचे खनिज, ऊर्जा और समुद्री विविधता की तलाश की जाएगी, जिसके लिए जरूरी विभागों से मंजूरी लेने काम फिलहाल जारी है। उम्मीद की जा रही है कि अगले तीन से चार महीनों में यह अभियान शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह एक गेम चेंजिंग मिशन साबित हो सकता है।

गौरतलब है भारत द्वारा शुरू करने जा रहे इस अभियान में कुल 4000 करोड़ रुपए का खर्च आ सकता है। माना जा रहा है कि इस अभियान से भारत के विशाल इकोनॉमिक जोन के प्रयास को बढ़ावा मिलेगा। राजीवन के मुताबिक मिशन के तहत गहरे समुद्री गतिविधियों के खास तकनीक का विकास भी किया जाएगा, जिसके लिए इसरो और डीआरडीओ जैसे संगठनों से मदद भी ली जाएगी। उनके मुताबिक समुद्र के बड़े हिस्से का अब तक इस्तेमाल नहीं हो पाया है और इस मिशन के तहत मानव पनडुब्बियों को विकास भी किया जाएगा।

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माना जा रहा है कि भारत का डीप ओसियन मिशन हिंद महासागर में देश की मौजूदगी को भी मजबूत करेगा। फिलहाल, ऐसे समुद्री मिशन में चीन, कोरिया और जर्मनी देश ही करते हैं। पिछले हफ्ते चीन ने मरियाना में खड़ी अपनी नई मानवीय खोजी पनडुब्बी की लाइव फुटेज दिखाई थी, जो चीन के मिशन का हिस्सा था। कहा जा रहा है कि समुद्र में खोज अभियान चलाने का फैसला बेहद अहम है।

उल्लेखनीय है भारत ने वर्ष 2016 में इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी के साथ 15 साल का करार किया था। यह करार हिंद महासागर में पॉली-मैटेलिक सल्पाइड्स (PMS) की तलाश करने के लिए हैं। इससे भारत को एक खास इलाके में समुद्री कानून के हिसाब से PMS की खोज करने के लिए एक्सक्लूजिव अधिकार मिल गए हैं। आईएसए ने भारत को 10,000 किलोमीटर में 15 साल तक PMS खोज करने की मंजूरी दी है।












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