लोकसभा के 'भंवर' में इन नवरत्नों ने पार लगाई मोदी की नैया
नई दिल्ली। जैसे-जैसे वोटों की गिनती शुरू होगी, वैसे-वैसे मतदाताओं ने देश का भाग्य किस के हाथ में सौंपा है यह सामने आ जाएगा। एक्जिट पोल के अनुसार मतदाताओं ने इस बार मोदी सरकार के पक्ष में मतदान किया है और भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। यदि ऐसा होता है तो इसके पीछे नरेंद्र मोदी की छवि और उनके प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता।
भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की लहर के साथ-साथ उनके नवरत्नों सहयोग भी कमतर नहीं आंका नहीं जाना चाहिए। जो हर वक्त मोदी के साथ मजबूती के साथ खड़े रहे और तमाम विरोधों के बावजूद इस चुनावी महासमर में उनके पक्ष में माहौल बनाने में कड़ी मेहनत की। घुमाइए स्लाइडर का पहिया और जानें कौन हैं उनके नवरत्न...

अमित शाह
मोदी के हनुमान माने जाने वाले अमित शाह को इस महासमर में उत्तर प्रदेश की कड़ी चुनौती थमा दी गई। जात-पात की राजनीति से प्रभावित उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा और उनके मजबूत कैडर को पार पाना शाह ने एक चुनौती के रूप में लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश का प्रभार संभालते ही निर्जीव पड़े भाजपा कैडर में जान फूंक दी।

भाजपा के नाथ
भाजपा के नाथ यानी राजनाथ सिंह ने पार्टी के एक धड़े के तीखे विरोध के बावजूद ना सिर्फ मोदी को पहले प्रचार अभियान का प्रमुख बनाया, बल्कि बाद में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार भी। राजनाथ की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मोदी जिनके साथ सीधे हॉट लाइन पर होते हैं, वो राजनाथ हैं।

अरुण जेटली
अरुण जेटली और नरेंद्र मोदी के बीच खूब जमती है। मोदी के सद्भावना उपवास कार्यक्रम के दौरान जेटली ने सार्वजनिक तौर पर मंच से कहा था कि उनके और मोदी के बीच हर दिन फोन पर बातचीत होती है। गुजरात विधानसभा चुनावों में भी जेटली की काफी सक्रिय भूमिका रही है। इशारों ही इशारों में सबसे पहले जेटली ने ही मोदी की पीएम पद की उम्मीदवारी के लिए माहौल बनाया था और बाद में अन्य शीर्ष नेताओं को मोदी के पक्ष में लामबंद किया।

नितिन गडकरी
दूसरों के उलट नितिन गडकरी के लिए मोदी के नवरत्नों में शामिल होना बहुत आसान नहीं था। गडकरी के पार्टी अध्यक्ष रहते मोदी से उनके टकराव के कई मामले सामने आए। कहा तो यहां तक जाता है कि गडकरी को दोबारा अध्यक्ष बनवाने के पक्ष में मोदी नहीं थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि गडकरी उनकी प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के रास्ते में रोड़ा बन सकते हैं।

स्मृति इरानी
छोटे परदे की चमक दमक से निकलकर राजनीति के खुरदुरे मैदान में उतरीं स्मृति इरानी ही वो नेता हैं, जिन्होंने नमो टी का आइडिया दिया। गुजरात के दंगों को लेकर कभी मोदी से इस्तीफा मांगने वाली तुलसी यानि स्मृति ने इस चुनाव में मोदी की छवि चमकाने में पूरी ताकत झोंक दी।

पीयूष गोयल
भाजपा के खजांची है पीयूष गोयल। पीयूष के पिता भी भाजपा में खजांची थे। स्मृति इरानी ने आइडिया दिया तो गोयल ने नमो टी का आयोजन सफलतापूर्वक अंजाम तक पहुंचाया। गोयल ही सोशल मीडिया का भी कामकाज देखते हैं।

रामलाल
रामलाल भाजपा में संगठन महामंत्री है। संघ के प्रतिनिधि रामलाल मोदी के काफी नजदीक माने जाते हैं। उन्होंने इस महासमर में मोदी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी।

अनंत कुमार
भाजपा में वरिष्ठ नेता अनंत कुमार कभी लालकृष्ण आडवाणी के कट्टर समर्थकों में शामिल थे। इसके बावजूद वे मोदी के नजदीक आए और इस महासमर में मोदी के लिए खुल कर चुनाव प्रचार किया। वाराणसी में हुए मोदी के रोड शो में वे भी शामिल थे।

गोपीनाथ मुंडे
महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री गोपीनाथ मुंडे जमीन से जुड़े नेता हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा के लिए भीड़ जुटाने वाले वे एकमात्र राजनेता हैं और महाराष्ट्र में पार्टी को खड़ा करने में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। गोपीनाथ मुंडे पिछड़े वर्गो में अच्छा प्रभाव रखने वाले महत्वपूर्ण ओबीसी नेता हैं। उन्होंने इस चुनाव में मोदी के पक्ष में लहर बनाने में महत्ती भूमिका निभाई है।












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