अब नहीं लेना होगा जनरल की टिकट, मोबाइल मैसेज दिखाकर कर सकते है यात्रा
नई दिल्ली। मोबाइल ऐप के जरिए जनरल टिकट बुक करने वालों को जल्द ही टिकट का प्रिंट नहीं लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यात्री जनरल टिकट का मोबाइल पर मैसेज दिखाकर यात्रा का आनंद ले सकते हैं। रेलवे जल्द ही इस सुविधा को शुरू करने वाला है। फिलहाल सेंटर ऑफ रेलवे इन्फार्मेशन सिस्टम (क्रिस) ने पूर्वोत्तर रेलवे के पांच स्टेशनों पर 'यूटीएस ऑनलाइन ऐप' को लांच किया है। इस व्यवस्था के तहत यात्री घर बैठे टिकट बना सकते हैं। रेलवे ये नई व्यवस्था इसलिए ला रही है क्योंकि लोगों के इस प्रक्रिया में काफी समय लग रहा था। जिसके चलते वे इस व्यवस्था से जुड़ने में कतरा रहे थे।

मोबाइल ऐप पर सुविधा के बावजूद लोग स्टेशन पर जाकर ले रहे थे टिकट
रेलवे मैसेज इस व्यवस्था को इसलिए ला रही है क्योंकि लोगो को टिकट बुक कराने के बाद स्टेशन पर एटीवीएम (ऑटोमेटिक टिकट वेंडिंग मशीन) और टिकट काउंटर से प्रिंट लेने की अनिवार्यता से यात्रियों को दिक्कतें हो रही है। इन दिक्कतों के चलते लोग स्टेशन टिकट काउंटर से टिकट लेने को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं । यात्रियों को इस दिक्कत से बचाने के लिए रेलवे जल्द ही मैसेज व्यवस्था लेकर आ रही है। यह मैसेज दिखाकर यात्री ट्रेन में बिना किसी परेशानी के सफर कर सकेंगे।

ऐसे करें ऐप से टिकट बुक
अगर आप इस के जरिए टिकट बुक कराना चाहते हैं तो आपको मोबाइल पर ‘यूटीएस आनलाइन ऐप' डाउनलोड करना होगा। मोबाइल नंबर से इस ऐप पर एक आईडी बनानी होगी। इसके बाद ऐप के वॉलेट में पैसे ट्रांसफर करने होंगे। मोबाइल ऐप के वॉलेट को रिचार्ज करने के लिए यात्री डेबिट व क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। जब ऐप के वॉलेट में पैसे आ जाएंगे तो आप जनरल टिकट बना सकेंगे। टिकट बुक करने बाद एक ओटीपी मैसेज मोबाइल पर आएगा। जिसे बताकर रेलवे टिकट काउंटर या एटीवीएम से प्रिंट लेना होता है।

रेलवे को जालसाजी का सता रहा है डर
अमर उजाला में छपी खबर के मुताबिक, छह फरवरी से शुरू हुई मोबाइल ऐप सुविधा से पूर्वोत्तर रेलवे में नौ दिनों में मात्र 37 टिकट ही बुक हुईं हैं। इसमें गोरखपुर से सफर करने वाले सबसे ज्यादा 20 यात्री है। मैसेज को यात्रा के लिए वैध करने पर रेलवे के सामने एक समस्या यह भी आ रही है कि कुछ लोग चेकिंग के वक्त टिकट बुक कराकर टीटीई को दिखा सकते हैं। इसे रोकने के लिए स्टेशन परिसर और सफर के समय टिकट बुक नहीं होने की तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। गूगल का इस्तेमाल कर स्टेशनों की सीमा और रेलवे ट्रैक को चिन्हित किया जाएगा।












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