भगवंत मान ने फिर से आम आदमी पार्टी को दिखाया आईना
आम आदमी पार्टी की हार के बाद भगवंत मान ने पार्टी के नेतृत्व पर खड़ा किया सवाल, बोले पार्टी मोहल्ला क्रिकेट टीम की तरह बर्ताव कर रही
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी को लगातार मिल रही हार के बाद पार्टी के भीतर आवाज उठने लगी है, एक तरफ जहां अरविंद केजरीवाल और तमाम आप नेता हार का ठीकरा ईवीएम मशीन पर फोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के सांसद भगवंत मान हार के लिए ईवीएम मशीन को जिम्मेदार मानने को तैयार नहीं है। दिल्ली में पार्टी की हार के बाद भगवंत मान ने कहा कि हार के बाद पार्टी मोहल्ला क्रिकेट टीम की तरह से बर्ताव कर रही है।

कई नेताओं ने दिया इस्तीफा
दिल्ली के एमसीडी चुनाव में भाजपा ने जबरदस्त जीत दर्ज करते हुए तीनों एमसीडी पर अपना कब्जा किया है, जबकि आम आदमी पार्टी दूसरे स्थान पर रही है, यही नहीं 2015 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो इस बार आम आदमी पार्टी का तकरीबन पचास फीसदी वोटबैंक उसके पास से खिसक गया है, पार्टी का वोट फीसद 54 से घटकर 26 फीसदी रह गया है। पार्टी की हार के बाद दिल्ली के प्रभारी दिलीप पांडे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, उनके अलावा दो अन्य नेताों संजय सिंह और दुर्गेश पाठक ने भी पंजाब में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

खुद हार की समीक्षा करनी चाहिए
पंजाब चुनाव में भगवंत मान पार्टी के स्टार प्रचारक रहे थे, जहां पार्टी को अपेक्षा के अनुसार बहुत ही कम सीट हासिल हुई, पंजाब में पार्टी को 117 मे से सिर्फ 20 सीटें हासिल हुई, जिसके बाद पार्टी ने ईवीएम मशीनों पर सवाल खड़ा करते हुए इसके साथ छेड़खानी का आरोप लगाया था, जिसके बाद पार्टी हर चुनाव में हार के लिए ईवीएम मशीनों को जिम्मेदार ठहरा रही है। लेकिन भगवंत मान का कहना है कि हार के बाद ईवीएम मशीन पर सवाल खड़ा करना सही नहीं है बल्कि हमें खुद की हार की समीक्षा करनी चाहिए।

पंजाब में पार्टी ने की ऐतिहासिक भूल
भगवंत मान ने कहा कि पंजाब के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने अपनी चुनावी रणनीति बनाने में ऐतिहासिक भूल की थी, जिसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा। वहीं आप के एक और नेता गुरप्रीत सिंह गुघ्घी ने भी पार्टी के नीति की आलोचना की थी। लेकिन भगवंत मान के बयान पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि पार्टी हार की समीक्षा करेगी लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईवीएम मशीनों के साथ छेड़खानी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि यह भरोसा करना मुश्किल है कि भाजपा इस तरह की जीत हासिल कर सकती है जब आप ने दिल्ली में इतना काम किया है, यह मोदी लहर नहीं बल्कि ईवीएम की लहर है।

दिल्ली के मंत्री ने भी उठाया सवाल
सिसोदिया ने कहा कि ऐसी कोई भी वजह नहीं है कि दिल्ली के लोग एमसीडी चुनाव में भाजपा को वोट करें, हम अपनी हार के पीछ के कारणों की समीक्षा करेंगे, उन्होंने कहा कि अगर किसी भी तरह का बदलाव होता तो हम उस बात को समझते लेकिन भाजपा ने दिल्ली में कुछ भी नहीं किया है। सिसोदिया ने कहा कि इतना बड़ा अंतर सिर्फ ईवीएम मशीनों में छेड़खानी करके ही पैदा किया जा सकता है। वहीं दिल्ली के एक मंत्री का कहना है कि हमें इस बात को देखने की जरूरत है कि कैसे 2015 में 70 में से 67 सीट जीतने के बाद दो साल के भीतर हमें इतनी बुरी हार का सामना करना पड़ा है।












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