एससी/एसटी एक्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का तुरंत बदलाव करने से इनकार
SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर स्टे लगाने से किया इनकार, 10 दिन बाद फिर सुनवाई
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नई दिल्ली। एससी/एसटी एक्ट मामले में हाल में दिए फैसले पर तत्काल रोक से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से दाखिल पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के बाद मंगलवार को कोर्ट ने मामले में किसी तरह के स्टे से इनकार कर दिया। ऐसे में एक्ट में हाल ही में जो बदलाव उच्चतम न्यायालय ने किये थे, वो जारी रहेंगे। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करके कोर्ट से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी। जिस पर आज दोपहर सुनवाई हुई। कोर्ट ने फैसले पर स्टे देने से इंकार करते हुए इस मामले में सभी पक्षों से अपने जवाब देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 11 अप्रैल को होगी।

सुप्रीमकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जो लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे है, उन्होनें हमारा फैसला तक नहीं पढ़ा है। हमारी चिंता उन बेकसूर लोगों को लेकर है, जो बिना गलती के जेल में है, हम एक्ट के खिलाफ नही है, हमारी चिंता एक्ट के दुरुपयोग को लेकर है। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने मंगलवार को भारत बंद के दौरान बड़े पैमाने पर हुई हिंसा और जान-माल के नुकसान का हवाला दिया था और तत्काल सुनवाई की अपील की थी, जिसके बाद न्यायालय सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सोमवार को दलित संगठनों ने भारत बंद का आह्वान किया था, इसमें भारी हिंसा हुई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम-1989 के दुरुपयोग को रोकने को लेकर गाइडलाइन जारी की थीं। यह सुनवाई महाराष्ट्र के एक मामले में हुई थी। ये गाइडलाइंस फौरन लागू हो गई थीं। जिसमें सरकारी कर्मी की तुरंत गिरफ्तारी नहीं होगी। सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत से होगी। आम लोगों के लिए एक्ट के तहत आरोपी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो उनकी गिरफ्तारी एसएसपी की इजाजत से होगी। अदालतों के लिए अग्रिम जमानत पर मजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर या नामंजूर करेंगे।












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