जेडीयू में शामिल हुए कई नेता तो बिहार बीजेपी चीफ बोले, पार्टी में बाहरियों के लिए जगह नहीं
पटना। बिहार बीजेपी प्रमुख संजय जायसवाल ने चुनावों के पहले पार्टी बदलकर आने वालों पर बड़ा बयान दिया है। जायसवाल ने कहा कि भाजपा में पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के लिए ही पहले जगह है न कि चुनाव के पहले सीट के लिए पार्टी बदलकर आने वालों के लिए। एक दिन पहले ही राज्य सरकार में भाजपा की सहयोगी जदयू ने राजद के कई नेताओं को पार्टी में शामिल कराया था। इनमें राजद नेता और लालू यादव के समधी चंद्रिका राय भी शामिल थे।
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इस पर बिहार बीजेपी के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि 'जेडीयू पार्टी के मसले पर कोई कमेंट नहीं करेंगे लेकिन भाजपा में विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी में आने वालों बाहरी लोगों के लिए कोई जगह नहीं है। जिन्हें पार्टी के लिए काम करना था उन्होंने पिछले साल नवम्बर-दिसम्बर में ही पार्टी ज्वाइन कर ली। भाजपा के पास 76 लाख निष्ठावान कार्यकर्ता हैं और पार्टी अपनी सभी पारंपरिक सीटों को जीतने के लिए पूरी मेहनत करेगी।'
जायसवाल ने कहा कि हमारे पास विधानसभा सीटों पर जीत के लिए मजबूत उम्मीदवारों की लंबी सूची है। ऐसे में कोई बाहरी लोगों को पार्टी में लाने का कोई विचार नहीं है। हालांकि कई लोग भाजपा की तरफ उम्मीद भरी नजर से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब बहुत देर हो चुकी है। भारतीय जनता पार्टी दीर्घकालिक विजन के साथ काम करती है और चुनावी समय में सीट के तलाश में पार्टी बदलने के लिए पार्टी में कोई जगह नहीं है।
सही समय पर सीट शेयरिंग पर बात- जायसवाल
वहीं जब एनडीए में सीट शेयरिंग को लेकर सवाल किया गया तो बीजेपी प्रमुख ने कहा कि सीट शेयरिंग को लेकर उचित समय और उचित स्तर पर बात होगी। इस पर अभी किसी चर्चा की जरूरत नहीं है।
जायसवाल ने कहा कि पिछली बार हम 157 सीटों पर चुनाव लड़े थे तो इस बार ये स्वाभाविक है कि हमें कुछ कम सीटों पर समझौता करना होगा क्योंकि राजग की तीनों पार्टियां अधिक से अधिक सीटें चाहेंगी। इस तरह हम पहले से ही अपने कुछ अच्छे उम्मीदवारों को टिकट न दे पाने की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति को चुनाव के लिए पार्टी में लाने के लिए कोई जगह ही नहीं है।'
जेडीयू में शामिल हुए छह नेता
बिहार बीजेपी प्रमुख के बयान को उन छह नेताओं नेताओं के परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है जो हाल में ही जेडीयू में शामिल हुए थे। इनमें लालू यादव के समधी चंद्रिका राय जैसे कई बड़े राजनैतिक परिवार भी हैं। माना जा रहा है कि इनके आने से टिकट को लेकर मारामारी बढ़ेगी। जेडीयू 2005 और 2010 में सीट शेयर के आधार पर अक्सर अपने आपको बड़ी पार्टी कहते हुए सबसे बड़ा दावेदार बताती रही है। 2015 के चुनावों में जेडीयू ने एनडीए से नाता तोड़ लिया है और महागठबंधन में शामिल हो गई थी।
एक दूसरे बीजेपी नेता ने बताया कि 2015 के विधानसभा चुनाव में बाहर से आने वाले ज्यादातर उम्मीदवार धराशायी हो गए थे। यही हाल झारखंड और महाराष्ट्र के चुनावों में भी देखने को मिला था जहां चुनाव के पहले पार्टी ज्वाइन कर सीट पाने वाले अधिकांश प्रत्याशी हार गए थे। यही वजह है कि पार्टी बाहर से आने वालों की जगह कार्यकर्ताओं को ही मौका देने का फैसला किया गया है।
वैसे ये बात जानना जरूरी है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जब जेडीयू राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन में शामिल हो गई थी तब बीजेपी ने ही सबसे ज्यादा दूसरी पार्टी से आने वाले नेताओं को टिकट दिया था। तब बीजेपी के 20 टिकट दूसरे पार्टियों से आए उम्मीदवारों को गए थे इनमें 10 सिटिंग एमएलए थे। हालांकि चुनावों में बीजेपी को सबसे अधिक वोट प्रतिशत के बावजूद महागठबंधन के मुकाबले बहुत कम सीटें मिली थीं। बीजेपी को 24.4 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि राजद को 18.4 और जेडीयू को 16.8 प्रतिशत तो कांग्रेस को 6.4 फीसदी वोट मिले थे।












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