कब्रिस्तान में नहीं जगह, घर के बेडरूम में दफनाते हैं लाश

चौंकिये नहीं, आगे बढ़ते हुए अगर आप टॉयलेट तक जायेंगे तो वहां भी किसी न किसी की कब्र जरूर मिल जायेगी। ऐसा नहीं है कि इन गांव वालों की कोई परम्परा इन्हें ऐसा करने पर मजबूर करती हो, और न ही ये लोग अपने मन से घर के अंदर कब्र बनाते हैं, वास्तव में ये मजबूर हैं, क्योंकि इनके घर में जब कोई मर जाता है और शव को दफनाने के लिये कब्रिस्तान ले जाते हैं, तो वहां उन्हें दफनाने की इजाजत नहीं मिलती है।
यह आलम चकरनगर गांव के तकिया इलाके का है, जो इटावा शहर से महज 35 किलोमीटर दूर है। जी हां मुलायम सिंह यादव के इटावा का। वो मुलायम जिनके बेटे अखिलेश मुस्लिम वोट के बल पर इस समय सीएम की कुर्सी पर विराजमान हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार तकिया के सुलाह अहमद समेत कई लोगों के घरों में कब्रें बनी हुई हैं।
अपनी मां की कब्र के बगल में सोते हैं बच्चे
इस इलाके में करीब 250 मुस्लिम रहते हैं, अधिकांश के घरों में बच्चे कब्रों के बगल में सोते हैं। गांव के निवासी मुखियार अली के अनुसार अक्सर बच्चे रात को जाग जाते हैं और रोने लगते हैं, क्योंकि उनके बिस्तर के ही बगल में उनकी मां की कब्र बार-बार मां की याद दिलाती है। सुलेमान ने बताया कि उनके भाई का इंतकाल पिछले साल हुआ था, उनके बच्चे आज तक अपने वालिद की मौत के सदमे से उबर नहीं पाये हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि घर के ड्राइंगरूम में ही कब्र है। यही कारण है कि पिछले एक साल से ड्राइंगरूम में रखा टीवी नहीं चला।
इस संबंध में इटावा के डीएम पी गुरु प्रसाद का कहना है कि चंदई गांव में कब्रिस्तान के लिये एक जगह सरकार की ओर से चिन्हित की गई है, लेकिन चकरनगर के निवासियों को वो मंजूर नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने वह जमीन तब उपलब्ध करायी थी, जब यहां के लोग मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिलने गये थे। गांव के जो लोग उस जमीन पर राजी हो गये, उन्होंने अपने परिजनों की कब्र खोद कर शव निकाले और नये कब्रिस्तान में जाकर दफ्न कर दिये, यानी कब्र स्थानांतरित कर दी। लेकिन ऐसा करने वाले बहुत कम लोग ही हैं।












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