प्लाज्मा थेरेपी कोरोना के उपचार में काम आएगी, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं: स्वास्थ्य मंत्रालय
प्लाज्मा थेरेपी इलाज में काम आए, अभी ऐसा कोई सबूत नहीं: स्वास्थ्य मंत्रालय
नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कहा है कि प्लाज्मा थेरेपी को कोरोना के इलाज के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके, अभी ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिल लव अग्रवाल ने कहा है कि प्लाज्मा थेरेपी विधि को लेकर प्रयोग जारी है, हालांकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि इसे उपचार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। ये कितनी प्रभावी कोरोना के खिलाफ होगी, इसके लिए ICMR बड़े स्तर पर अध्ययन कर रहा है।
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दावा किया जा रहा है कि कोरोना संक्रमण से पूरी तरह ठीक हुए लोगों के खून में एंटीबॉडीज बन जाती हैं, जो उसे संक्रमण को मात देने में मदद करती हैं। प्लाज्मा थैरेपी में यही एंटीबॉडीज, प्लाज्मा डोनर यानी संक्रमण को मात दे चुके व्यक्ति के खून से निकालकर संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। डोनर और संक्रमित का ब्लड ग्रुप एक होना चाहिए। इसी पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने जवाब दिया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने देश कोरोना मरीजों को लेकर बताया है कि पिछले एक दिन में देश में 1543 नए मामले आए हैं, जिससे कुल संक्रमित मामलों की संख्या 29435 हो गई है। देश में अब तक 934 लोगों की मौतइस वायरस से हो चुकी है। देश में समय कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 21632 है। वहीं 6869 मरीज रिकवर हुए हैं और अब तक ठीक होकर घर जा चुके हैं। पिछले 24 घंटे में 684 लोग ठीक हुए हैं, रिवकरी रेट 23.3 प्रतिशत हो गया है। वहीं देश में 17 ऐसे जिले हैं जहां पहले पॉजिटिव मामले मिले थे परन्तु पिछले 28 दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है।
भारत में कोरोना संक्रमण के मामले महाराष्ट्र और गुजरात में सबसे ज्यादा हैं। महाराष्ट्र में इस महामारी से पीड़ितों की संख्या 8590 है। महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा 369 लोगों की मौत हुई है। गुजरात में कोरोना संक्रमण के 3548 मामले सामने आए हैं और 162 लोगों की मौत हुई है।












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