भारत में बन रहीं 6 पनडुब्बियों में नहीं लगेगा DRDO का स्वदेशी AIP, ये है वजह
नई दिल्ली, 12 जुलाई: भारतीय सेना के लिए 6 नई स्वदेशी पनडुब्बियां तैयारी की जा रही हैं। जिनकी लागत 50 हजार करोड़ से ज्यादा की होगी, लेकिन इसमें स्वदेशी एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम (एआईपी) नहीं लगाया जाएगा। इस सिस्टम को भी डीआरडीओ ने विकसित किया है। इसकी खास बात ये है कि इसके जरिए पनडुब्बी ज्यादा देर तक पानी के अंदर रह सकती है। साथ ही उसे आसपास के जहाज आसानी से नहीं पकड़ सकते हैं। वहीं जिन पनडुब्बियों में ये सिस्टम नहीं लगा रहता है, उन्हें तय वक्त पर पानी के ऊपर आना पड़ता है, ताकि वो ऑक्सीजन के जरिए अपनी बैटरियों को चार्ज कर सकें।

दरअसल रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद ने हाल ही में देश में ही 6 नई पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों के निर्माण के लिए पी -75 इंडिया नामक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इसके लिए बकायदा 50 हजार करोड़ की राशि भी मंजूर की गई है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया कि डीआरडीओ चाहता है कि उसके अंडर-डेवलपमेंट एआईपी को इन पनडुब्बियों में लगाया जाए, लेकिन अभी तक टेंडर में इसे शामिल नहीं किया गया है।
क्यों नहीं मिली मंजूरी?
अभी प्रोजेक्ट का टेंडर लेने के लिए लार्सन एंड टुब्रो और मझगांव डाक यार्ड्स लिमिटेड के बीच रेस जारी है। साथ ही इसमें 5 विदेशी फर्मो की साझेदारी होगी, जो हाईटेक उपकरणों की सप्लाई करेंगे। सूत्रों के मुताबिक जब स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियां रिफिटिंग के लिए आएंगी, तो उससे पहले डीआरडीओ को अपने एआईपी की क्षमता का प्रदर्शन करना होगा। अगर वो सभी पैमानों पर खरे उतरे, तो उनको लगाने की अनुमति दी जाएगी, वरना अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।












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