चाचा-भतीजे के बीच नहीं खत्म हो रहा मनमुटाव, सुलह की उम्मीदों पर पानी फिरा

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के भीतर पारिवारिक कलह को सुलझाने की कोशिश एक बार फिर से नाकाम रही है। इस बाबत पार्टी के वरिष्ठ नेता मुलायम सिंह यादव की तमाम कोशिशें धूमिल होती नजर आ रही हैं। हाल के दिनों के घटनाक्रम के बाद माना जा रहा था कि चाचा-भतीजे में सुलह हो सकती है और दोनों एक बार फिर से साथ आ सकते हैं। दरअसल मुलायम सिंह यादव की तबीयत खराब होने के बाद दोनों ही नेताओं को एक साथ देखा गया था, जिसके बाद कयास लग रहे थे कि चाचा-भतीजे साथ आ सकते हैं, लेकिन ये तमाम अटकलें बेजा साबित होती दिख रही हैं।

सुलह की खबरों में दम नहीं

सुलह की खबरों में दम नहीं

दरअसल सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुलायम सिंह का हालचाल लेने उनके आवास पहुंचे थे, इस दौरान अखिलेश यादव और शिवपाल यादव भी वहां मौजूद थे। खुद योगी आदित्यनाथ ने इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर साझा कियाा था, लेकिन उन्होंने इस तस्वीर में शिवपाल यादव का जिक्र नहीं किया था, जिसके बाद साफ हो गया था कि शिवपाल और अखिलेश के बीच सुलह होती नजर नहीं आ रही है। खुद अखिलेश यादव के करीबियों ने इस बात के संकेत दिए थे कि दोनों नेताओं के बीच सुलह की खबरों में कोई दम नहीं है।

शिवपाल एकला चलो की राह पर

शिवपाल एकला चलो की राह पर

वहीं दूसरी तरफ शिवपाल यादव की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी की बात करें तो इसके तमाम जिलाध्यक्षों की बैठक में यह फैसला लिया गया है कि पार्टी को अकेले आगे बढ़ने के लिए मजबूत कियाा जाएगा। शिवपाल की सपा में वापसी के बीच सबसे बड़ा रोड़ा अखिलेश यादव हैं, वह नहीं चाहते हैं कि जिस तरह से उन्होंने पूरी सियासी लड़ाई लड़ने के बाद पार्टी के भीतर वर्चस्व स्थापित किया है उससे कोई समझौता किया जाए।

 हार के बाद पार्टी के भीतर दबाव

हार के बाद पार्टी के भीतर दबाव

लगातार दो बार लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में हार के बाद यादव परिवार के भीतर इस बात का दबाव है कि वह परिवार के भीतर पड़ी फूट को खत्म करे। इसके लिए पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने खुद अपने प्रयास किए, वह निजी तौर पर चाहते हैं कि पार्टी को खड़ा करने वाला उनका भाई शिवपाल यादव फिर से पार्टी में वापस आए। सूत्रों का कहना है कि जब सपा धुर विरोधी कांग्रेस और बसपा के साथ गठबंधन कर सकती है तो आखिर शिवपाल यादव से समझौता क्यों नहीं किया जा सकता है। लेकिन अखिलेश यादव इसके लिए कतई तैयार नहीं हैं।

अखिलेश हैं समझौते के खिलाफ

अखिलेश हैं समझौते के खिलाफ

अखिलेश यादव के करीबियों की मानें तो अखिलेश यह कतई नहीं चाहते हैं कि पार्टी में एक बार फिर से सत्ता के कई केंद्र बनें। अगर शिवपाल यादव की पार्टी में वापसी होती है तो इस बात की संभावनाएं बढ़ जाएंगी कि पार्टी के भीतर एक से अधिक सत्ता के केंद्र बनेंगे। इसके साथ ही अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच व्यक्तिगत कड़वाहट भी एक वजह रही है जिसकी वजह से अखिलेश शिवपाल से समझौता करने के मूड में नहीं हैं।

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