विपक्षी एकता: बीजेपी को सीधी टक्कर देने से क्या होगा नीतीश जी? 2019 के ये आंकड़े देख लीजिए

Opposition unity: विपक्ष की ओर से बीजेपी को 2024 में सीधी टक्कर देने के लिए ही मंथन चल रहा है। नीतीश कुमार खूब माथा खपा रहे हैं। लेकिन, 2019 के आंकड़ों से विपक्ष को निराशा मिल सकती है।

Opposition unity

नीतीश कुमार की पहल पर 12 जून को भाजपा-विरोधी विपक्षी दलों का पटना में जमावड़ा लग रहा है। अधिकतर विपक्षी नेताओं ने उसमें शामिल होने को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी हामी भर दी है। ममता बनर्जी ने तो इस बैठक का सुझाव ही दिया था। लेकिन, बिहार के सीएम नीतीश कुमार जिस एजेंडे के साथ आगे बढ़ रहे हैं, उसमें पूरा दम नजर नहीं आ रहा है।

भाजपा को अधिकतर सीटों पर सीधी टक्कर देना चाहता है विपक्ष
बिहार के मुख्यमंत्री और जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार का 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए मुख्य एजेंडा है, अधिकतर सीटों पर भाजपा को सीधी चुनौती देने लायक स्थितियां तैयार करना। कुछ आंकड़ों के मुताबिक उनकी पार्टी ने देशभर की 543 लोकसभा सीटों में से 475 की योजना तैयार की है, जहां पर उनकी कोशिश है कि बीजेपी के खिलाफ विपक्ष का एक ही संयुक्त उम्मीदवार हो।

टीएमसी भी कांग्रेस को दे चुकी है संदेश
नीतीश के विचार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भी समर्थन मिला हुआ है। टीएमसी की ओर से कांग्रेस को यही सलाह देने की कोशिश की गई है कि क्षेत्रीय दलों के जनाधार वाले राज्यों से वह दूरी बना ले तो पूरा विपक्ष कांग्रेस को वहां हर तरह से समर्थन देने के लिए तैयार होगा, जहां ऐसे दलों की कोई खास भूमिका नहीं है।

भाजपा-विरोधी वोटों में बिखराव रोकना चाहता है विपक्ष
कुल मिलाकर पहल इस बात की हो रही है कि भाजपा-विरोधी दलों के वोटों में बिखराव न हो ताकि बीजेपी को ज्यादा से ज्यादा सीटों पर घेर लिया जाए। अब अगर हम 2019 के लोकसभा चुनाव के कुछ आंकड़ों पर नजर डाल लें तो विपक्षी दलों के दावों की असलियत का अंदाजा हो सकता है।

भाजपा का गढ़ ज्यादा मजबूत दिखता है
2019 के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों को देखने से पता चलता है कि प्रत्येक राजनीतिक दलों का कुछ ना कुछ अपना मजबूत गढ़ है, जहां वह बीजेपी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। लेकिन, जहां तक भाजपा की बात है तो इसका किला ज्यादा बड़ा है।

190 सीटों पर सीधे मुकाबले में बीजेपी ने कांग्रेस को 175 सीटों पर हराया
मतलब अगर हम लोकसभा की कुल 543 सीटों की बात करें तो 375 सीटों पर बीजेपी के साथ या तो कांग्रेस या फिर अन्य पार्टियों का सीधा मुकाबला हुआ था। इनमें से बीजेपी और कांग्रेस के बीच 190 सीटों पर सीधी भिड़ंत हुई थी और भाजपा 175 (92.1%) सीटों पर जीती थी और कांग्रेस को सिर्फ 15 (7.9%) सीटें मिली थीं।

भाजपा सिर्फ 375 सीटों पर सीधे मुकाबले में रही और 303 जीत गई
वहीं 185 सीटों पर भाजपा का सीधा मुकाबला गैर-कांग्रेसी दलों के साथ हुआ था। यहां भी बीजेपी 128 (69.2%) सीटें जीत गई और अन्य दलों को महज 57 (30.8%) सीटें ही मिलीं । इस तरह से सिर्फ 375 सीटों पर ही बीजेपी सीधी फाइट में थी और वहां भी उसने कुल 303 सीटें जीतकर मजबूती के साथ सरकार बना ली।

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    विपक्षी दलों के दावे में ये भी हैं झोल
    विपक्षी दलों के दावे की दो कमजोरियां और भी नजर आती हैं। देश में कुल 71 लोकसभा सीटें ऐसी थीं, जहां सीधी टक्कर कांग्रेस और अन्य दलों के बीच थी। उनमें से कांग्रेस 37 और अन्य दलों ने 34 सीटें जीती थीं। बाकी 97 सीटों पर न तो कांग्रेस और न ही बीजेपी टक्कर में थी।

    मतलब नीतीश रणनीति तो बना रहे हैं 475 सीटों पर बीजेपी को सीधी टक्कर देने की। लेकिन, हकीकत ये है कि 2019 में बीजेपी सिर्फ 375 सीटों पर ही सीधे मुकाबले में थी और उसी में से उसने जीत का इतिहास दर्ज कर लिया।

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