नीतीश कुमार का बड़ा बयान- बिहार में नहीं लागू होगा NRC, NPR 2010 के पैटर्न पर
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनआरसी और एनपीआर पर अपना स्टैंड साफ करते हुए कहा कि, राज्य में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस लागू(एनआरसी) नहीं होगा और नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर(एनपीआर) भी उसी तरह अपडेट होगा जैसा साल 2010 में हुआ था। विधान सभा चुनाव में मुसलमान वोटरों के खिसकने का अंदाजा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगा चुके हैं। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर समर्थन से उनकी पार्टी का तबका नाराज है। ऐसे में उनकी नाराजगी दूर करने की कवायद नीतीश कुमार ने शुरू कर दी है।

नए NPR से कन्फ्यूजन: नीतीश
रविवार को हायाघाट प्रखंड के चंदनपट्टी स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विवि (मानू) में सभा को संबोधित करते हुए सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि, राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) यहां (बिहार) लागू नहीं किया जाएगा और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) 2010 के पैटर्न पर लागू किया जाएगा। जेडीयू अध्यक्ष ने कहा, एनपीआर के नए स्वरूप को लेकर कई तरह का कन्फ्यूजन लोगों के दिमाग में है। वैसी परिस्थिति में बेहतर यही होगा कि पुराने मॉडल पर ही एनपीआर लागू किया जाएगा।

हमें बापू की तरह ही मौलाना को भी याद करने की जरूरत
नीतीश कुमार ने कहा कि, देश की आजादी और शिक्षा को आगे बढ़ाने में मौलाना अबुल कलाम आजाद का बहुत बड़ा योगदान है। वे देश के विभाजन के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने खासकर मुस्लिम समुदाय के लोगों को प्रेरित किया कि वे देश छोड़कर ना जाएं। आज भारत में मुसलमानों की जो इतनी संख्या है वह उन्हीं की देन है। इसलिए हमें बापू की तरह ही मौलाना को भी याद करने की जरूरत है।

गिनाई अपनी उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में पहले 12.5 प्रतिशत बच्चें स्कूलों से बाहर थे, जिनमें अधिकांश बच्चें अल्पसंख्यक और दलित-महादलित समुदाय से थे, उन्हें स्कूलों तक पहुंचाने के लिए विशेष पहल किया गया जिसका परिणाम है कि अब एक प्रतिशत से भी कम बच्चें स्कूलों से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि पहले मांग करने पर मदरसा शिक्षकों की पिटाई होती थी लेकिन हम लोगों ने सातवां वेतन आयोग लागू किया।












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