क्या PM के मजबूत दावेदार बनने की रणनीति के तहत नीतीश ने थामी जदयू की कमान?
पटना (मुकुन्द सिंह)। 2014 में प्रधानमंत्री बनने की रणनीति में मोदी के हाथों करारी मात खाने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में मोदी के खिलाफ प्रधानमंत्री का मजबूत दावेदार बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जदयू के अध्यक्ष की कमान थाम ली है। अपने दल के दिग्गज नेता शरद यादव को दरकिनारे करते हुए जहां एक तरफ नीतीश ने जयदू की कमान संभाली है वहीं दूसरी तरफ उप्र की पीस पार्टी, अपना दल व राष्ट्रीय लोक दल जैसे दलों के साथ मिल कर एक नया मजबूत दल बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रहे है।

सन् 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री का सबसे मजबूत दावेदार बनने के लिए ही नीतीश कुमार ने बिहार राज्य में पूर्ण शराब बंदी लागू करने को, अपनी छवि देश भर में एक समाज सुधारक नेता की तौर पर पेश करने का एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में ही देखा जा रहा है। गौरतलब है कि इसी लक्ष्य को 2014 के लोकसभा चुनाव में ही संधान करने के लिए नीतीश कुमार ने बहुत ही चतुराई से भाजपा से अपना लंबा गठबंधन तोड़ कर यकायक नरेन्द्र मोदी को अछूत बता कर कांग्रेसी गठबंधन के सहारे चंद्रशेखर की तरह प्रधानमंत्री बनाने का असफल दाव चला था।
इसी प्रकार जंगल राज व भ्रष्टाचार का पर्याय जिस लालू को वे एक दशक तक बिहार में बताते रहे उसी लालू से गठबंधन करके नीतीश ने फिर बिहार विधानसभा के चुनाव में सत्तासीन हो कर साबित कर दिया कि वे केजरीवाल की तरह ही देश के सबसे अवसरवादी नेता है। हालांकि देश में वर्तमान में हर दल का ऐसा ही शर्मनाक पतन है। भाजपा के मोदी हो या कांग्रेस, केजरीवाल हो या वामपंथी या मुलायम, लालू, बादल, चोटाला या ममता आदि सबका एक ही सिद्धांत है देश, प्रदेष व सिद्धांत जाय भाड़ में हर हाल में इनको सत्ता चाहिए।












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