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Nitin Nabin Security: BJP अध्यक्ष बनते ही Z सिक्योरिटी,क्या है ये सुरक्षा घेरा? कैसे मिलेगी 24 घंटे हिफाजत

Nitin Nabin Security: भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे नितिन नबीन की सुरक्षा अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत कर दी गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन्हें Z कैटेगरी की सुरक्षा मुहैया करा दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन को एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 45 साल की उम्र में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे नितिन नबीन इस पद को संभालने वाले सबसे युवा नेताओं में शामिल हैं, और इसी के साथ उनकी जिम्मेदारियों के साथ सुरक्षा का स्तर भी बढ़ा दिया गया है।

गृह मंत्रालय का फैसला, IB रिपोर्ट बनी आधार

सूत्रों के मुताबिक, नितिन नबीन को Z कैटेगरी की सुरक्षा कुछ दिन पहले ही दे दी गई थी। यह निर्णय इंटेलिजेंस ब्यूरो की ओर से तैयार की गई थ्रेट परसेप्शन रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। रिपोर्ट में उनके लिए संभावित खतरों का आकलन किया गया था, जिसके बाद गृह मंत्रालय को सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश भेजी गई। गृह मंत्रालय ने इस पर मुहर लगाते हुए Z श्रेणी की सुरक्षा को मंजूरी दे दी।

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CRPF के कमांडो संभालेंगे सुरक्षा जिम्मेदारी

अब नितिन नबीन की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के विशेष रूप से प्रशिक्षित कमांडो संभालेंगे। Z कैटेगरी की सुरक्षा के तहत हर वक्त हथियारबंद जवान उनके साथ मौजूद रहेंगे। इसमें क्लोज प्रोटेक्शन टीम, एस्कॉर्ट वाहन और रिहायशी सुरक्षा भी शामिल होगी। पार्टी अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नबीन की राजनीतिक गतिविधियां और सार्वजनिक कार्यक्रम तेजी से बढ़ने वाले हैं, ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां कोई जोखिम नहीं लेना चाहतीं।

क्या होती है Z कैटेगरी की सुरक्षा?

Z कैटेगरी की सुरक्षा भारत में दी जाने वाली प्रमुख वीआईपी सुरक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इसे देश की तीसरी सबसे ऊंची सुरक्षा श्रेणी माना जाता है। इस सुरक्षा में आमतौर पर करीब 22 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जो 24 घंटे व्यक्ति की सुरक्षा में लगे रहते हैं। इनमें 4 से 6 बेहद प्रशिक्षित कमांडो शामिल होते हैं, जबकि बाकी जवान CRPF या राज्य पुलिस से होते हैं।

कैसा होता है सुरक्षा कवच?

Z श्रेणी की सुरक्षा में केवल व्यक्ति के आसपास जवान तैनात करना ही नहीं होता, बल्कि पूरा सुरक्षा घेरा तैयार किया जाता है। इसमें निजी सुरक्षा अधिकारी, सशस्त्र गार्ड, निगरानी टीम और एस्कॉर्ट कार शामिल होती है। आवास पर भी 2 से 8 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं।

यात्रा के दौरान एस्कॉर्ट वाहन साथ चलता है और जरूरत पड़ने पर बुलेटप्रूफ गाड़ी और विशेष संचार उपकरण भी उपलब्ध कराए जाते हैं। सुरक्षा व्यवस्था इस तरह बनाई जाती है कि किसी भी संभावित खतरे से तुरंत निपटा जा सके।

Z और Z+ सुरक्षा में क्या फर्क

Z श्रेणी से ऊपर Z+ सुरक्षा होती है। Z+ सुरक्षा में करीब 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं, जिनमें 10 या उससे ज्यादा NSG कमांडो शामिल होते हैं। यह सुरक्षा देश की सबसे कड़ी व्यवस्थाओं में से एक मानी जाती है।

वहीं Z कैटेगरी उन लोगों को दी जाती है, जिन्हें मध्यम से उच्च स्तर का खतरा माना जाता है, जैसे बड़े राजनीतिक नेता, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री या प्रभावशाली हस्तियां।

स्थिति पर लगातार नजर

गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियां नितिन नबीन की सुरक्षा को लेकर लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। अगर खतरे का स्तर बढ़ता है या परिस्थितियां बदलती हैं, तो सुरक्षा व्यवस्था में आगे भी बदलाव किया जा सकता है। फिलहाल Z कैटेगरी की सुरक्षा को पर्याप्त माना गया है।

कैसे बने नितिन नबीन बीजेपी अध्यक्ष?

नितिन नबीन के अध्यक्ष बनने की प्रक्रिया भी खास रही। सोमवार को चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर के लक्ष्मण ने उनके समर्थन में दाखिल 37 सेट नामांकन पत्र स्वीकार किए। इनमें 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समर्थन पत्र आए, जबकि एक संसदीय पार्टी की ओर से था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, धर्मेंद्र प्रधान, भूपेंद्र यादव, किरण रिजिजू, हरदीप पुरी, निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके नामांकन का समर्थन किया।

दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में नामांकन के दौरान कई राज्यों के मुख्यमंत्री, राज्य बीजेपी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। दिल्ली, गुजरात, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से समर्थन मिलने के बाद यह तय हो गया कि नितिन नबीन पार्टी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे।

सुरक्षा के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी

Z कैटेगरी की सुरक्षा मिलना केवल एक प्रशासनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत भी है कि नितिन नबीन अब देश की राजनीति में बेहद अहम भूमिका निभाने जा रहे हैं। सुरक्षा कवच के बीच उनकी हर गतिविधि पर नजर रहेगी, ताकि वे बिना किसी डर और बाधा के अपने राजनीतिक दायित्व निभा सकें।

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