नितिन गडकरी ने क्यों कहा- देश मनमोहन सिंह का ऋणी रहेगा
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा कि आर्थिक सुधारों के लिए ये देश उनका कर्ज़दार रहेगा.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी मंगलवार को दिल्ली में आयोजित 'टीआईओएल पुरस्कार 2022’ समारोह को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने इस दौरान ये भी कहा कि भारत को एक उदार आर्थिक नीति की ज़रूरत है जिसमें ग़रीबों को भी लाभ पहुँचाने की मंशा हो.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 1991 में वित्त मंत्री रहते हुए मनमोहन सिंह की ओर से शुरू किए गए आर्थिक सुधारों ने भारत को एक नई दिशा दिखाई.
मनमोहन सिंह की तारीफ़ में क्या-क्या बोले गडकरी
नितिन गडकरी ने कहा, “लिबरल इकोनॉमी (उदार अर्थव्यवस्था) के कारण देश को नई दिशा मिली, उसके लिए मनमोहन सिंह का देश ऋणी है.”
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि उदार अर्थव्यवस्था किसानों और गरीब लोगों के लिए है.
इस मौके पर गडकरी ने नब्बे के दशक में सड़क निर्माण के लिए धन जुटाने के लिए की गई मशक़्क़त का भी ज़िक्र किया. उस समय गडकरी महाराष्ट्र सरकार में मंत्री पद पर थे.
उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह की ओर से शुरू किए गए आर्थिक सुधारों की वजह से ही वो सड़क परियोजनाओं के लिए पैसे जुटा सके थे.
ये पुरस्कार समारोह 'टैक्सइंडियाऑनलाइन’ नाम के पोर्टल ने आयोजित किया था.
उन्होंने कहा कि उदार अर्थव्यवस्था की नीतियां किसी देश के विकास में कितनी मददगार होती हैं, इसे समझने के लिए चीन बेहतर उदाहरण है.
नितिन गडकरी के इस बयान पर पत्रकार और लेखक परॉन्जय गुहा ठाकुरता लिखते हैं कि नजाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पर कैसी प्रतिक्रिया देंगे.
https://twitter.com/paranjoygt/status/1590017549756149761
नितिन गडकरी के इस बयान पर पार्टी का क्या रुख होगा ये वक़्त ही बता सकता है लेकिन गडकरी पहले भी ऐसे बयान देते आए हैं जो शायद पार्टी को नाग़वार गुज़रे और कई बार बीजेपी इन बयानों की वजह से असहज स्थिति में आ गई.
https://www.youtube.com/watch?v=o8jqdd6btTE
बीजेपी संसदीय बोर्ड से बाहर किए गए थे गडकरी
एक वक़्त बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके नितिन गडकरी हमेशा से अपने विचारों को स्पष्टता से रखते आए हैं और उनकी छवि दमदार नेता की है.
इसी साल भारतीय जनता पार्टी ने अपने संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति दोनों से बाहर कर दिया था. कहा गया नितिन गडकरी की ओर से दिए जाने वाले ग़ैर-ज़रूरी और चुटीले बयानों की वजह से पार्टी ने ये कार्रवाई की.
इतना ही नहीं पिछले 20 सालों से नितिन गडकरी की राजनीति को करीब से देखने-समझने वाले बीबीसी मराठी के पूर्व संवाददाता प्रणीण मुधोलकर का मानना है कि बीते 9 सालों में गडकरी का बीजेपी में कद छोटा हुआ है.
इसी साल नितिन गडकरी ने नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि “महात्मा गांधी के समय राजनीति देश, समाज, विकास के लिए होती थी, लेकिन अब राजनीति सिर्फ़ सत्ता के लिए होती है. कभी-कभी उनका मन राजनीति छोड़ देने का करता है.” इस बयान के कुछ समय बीतने के बाद ही उन्हें पार्टी में अहम पदों से हटा दिया गया था.
नितिन गडकरी के कुछ पुराने बयान
https://www.youtube.com/watch?v=TTEJN0plqfo
अपनी सरकार के ख़िलाफ़ भी बोलते आए हैं गडकरी
वो बेबाकी से अपनी राय रखते आए हैं. यही वजह है कि कई बार उनके बयान पार्टी के रुख से अलग लाइन पर दिखते हैं.
इसी साल सितंबर महीने में गडकरी ने आरएसएस से प्रेरित संगठन भारत विकास परिषद को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत दुनिया की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के तौर पर उभरा है लेकिन भारत के लोग ग़रीब हैं.
इसे केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना समझा गया.
गडकरी ने ये भी कहा था कि भारत के लोग भुखमरी, बेरोज़गारी, जातिवाद, छुआछूत और बढ़ती महंगाई से जूझ रहे हैं. गडकरी ने कहा था कि अमीर और ग़रीब के बीच का फासला लगातार बढ़ रहा है और इसे कम करने के लिए एक सेतु बनाने की ज़रूरत है.
इससे पहले नितिन गडकरी ने मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान ये भी कहा था कि “सरकार में समय पर फ़ैसले नहीं लिए जाते हैं.”
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उन्होंने कहा था, ''निर्माण के मामले में समय सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है. समय सबसे बड़ी पूंजी है. सबसे बड़ी समस्या ये है कि सरकार फ़ैसले समय पर नहीं लेती है.''
उन्होंने कहा था , ''आप चमत्कार कर सकते हैं. हमारे पास क्षमता है. मेरा कहना है कि भारत के बुनियादी ढांचे का भविष्य सुनहरा है. हमें दुनिया और भारत की अच्छी तकनीक़, अच्छी रिसर्च और सफ़ल तरीक़ों को स्वीकार करना होगा.
बीजेपी जहां देश में आपातकाल लगाने के लिए इंदिरा गांधी की जमकर आलोचना करती रही है, वहीं साल 2019 में नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने इंदिरा गांधी की प्रशंसा की थी. उन्होंने कांग्रेस पार्टी के सम्मानित पुरुष नेताओं के बीच अपनी जगह बनाने और क्षमता साबित करने वाली इंदिरा गांधी की तारीफ़ की थी.
साल 2018 में महाराष्ट्र में जब मराठा आरक्षण का मुद्दा ज़ोरों पर था तब केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये कहकर मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी थीं कि आरक्षण देने का क्या फ़ायदा जब देश में नौकरियां ही नहीं हैं.रे पास वैकल्पिक संसाधन होने चाहिए जिससे हम गुणवत्ता से समझौता किए बिना लागत घटा सकें.''
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