#DeathWarrant:फांसी के वक्त जेलर से लेकर जल्लाद तक सिर्फ इशारों में क्यों करते हैं बात? जानिए
नई दिल्ली- करीब सात साल बाद आखिरकार वह वक्त आ गया जब दिल्ली गैंगरेप पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जग गई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के चारों दोषियों की डेथ वारंट पर दस्तखत कर दिए हैं। निर्भया कांड के चारों गुनहगार अब सिर्फ 22 जनवरी की सुबह 7 बजे तक खुली हवा में सांस ले सकेंगे, जिसके बाद उनकी सांसें हमेशा-हमेशा के लिए रुक जाएंगी। जिस वक्त तिहाड़ जेल की फांसी कोठी में जल्लाद निर्भया के दोषियों को फांसी के तख्ते पर खड़ा करेगा, उससे कुछ समय पहले से ही फांसी कोठी के आस-पास सिर्फ सन्नाटा पसरा होगा। किसी के भी आपस में बात करने की मनाही होगी। जेलर से लेकर जल्लाद तक सभी मौन साध लेंगे और उन्हें जो भी बात करनी होगी वह सिर्फ इशारों में ही कर पाएंगे। जानिए, इसके पीछे का कारण क्या है कि फांसी कोठी में किसी को बोलने की इजाजत नहीं होती।

इस वजह से होती है सिर्फ इशारों में बात
फांसी के तख्ते के पास दोषियों के अलावा सिर्फ जल्लाद मौजूद होता है। इन दोनों के अलावा वहां पर पास ही में कुछ पुलिसकर्मी मौजूद होते हैं और थोड़ी ही दूर पर जेल अधीक्षक, जेलर, डॉक्टर और संबंधित अधिकारी मौजूद रहते हैं। लेकिन, इतने लोगों की मौजूदगी के बावजूद वहां आपस में किसी की कोई बात नहीं होती और सिर्फ इशारों में ही एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचायी जाती है। फांसी की प्रक्रिया को अंजाम देने वाले पवन (जल्लाद) के मुताबिक 'ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि, दोषी परेशान न हो जाए और वह घबराहट में कोई अजीब हालात न पैदा कर दे। यही वजह है कि वहां पर लोग सिर्फ इशारों में ही बातें करते हैं और सभी चुप्पी साधे रहते हैं।' इसकी वजह से वहां क्या हो रहा होता है, इससे दोषी पूरी तरह से अनजान होता है और उसे कुछ पता ही नहीं चल पाता कि कौन सा पल उसकी जिंदगी का आखिरी पल साबित होने वाला है।

मेरठ जेल से तिहाड़ आएगा जल्लाद
इस बीच दिल्ली के तिहाड़ जेल प्रशासन ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने के लिए यूपी के मेरठ से जल्लाद को बुलाया जा रहा है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक (जेल) आनंद कुमार ने भी बताया था कि तिहाड़ जेल ने पत्र के माध्यम से प्रदेश में जल्लादों की उपलब्धता पर जानकारी मांगी थी। उन्होंने जानकारी दी थी कि हमारे पास फांसी देने के लिए दो अधिकृत जल्लाद लखनऊ और मेरठ जेल में उपलब्ध हैं, तिहाड़ जेल को जब भी आवश्यकता पड़ेगी, उन्हें दोनों उपलब्ध करा दिए जाएंगे। जेल विभाग को तिहाड़ जेल से नौ दिसंबर को ही फैक्स से यह पत्र मिला था। अब यह साफ हो चुका है कि निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए ही यूपी पुलिस से जल्लाद की मांग की गई थी।

बिहार के बक्सर जेल से मंगाई गई हैं रस्सियां
तिहाड़ प्रशासन पहले ही बता चुका है कि बिहार के बक्सर जेल से फांसी के लिए नई रस्सियों का ऑर्डर दिया था। बता दें कि फांसी के लिए बक्सर जेल के कैदी खास तरह की रस्सी तैयार करते हैं और यहीं से इसकी विभिन्न जेलों में जरूरतों के मुताबिक सप्लाई होती है। ये रस्सियां खास प्रकार की होती हैं, जिन्हें ऐसे बनाया जाता है कि फांसी के दौरान टूटने का खतरा न रहे और न ही इससे दोषी का गला कटना चाहिए। तिहाड़ जेल के पास इस काम के लिए पुरानी रस्सियां मौजूद थीं, लेकिन जेल प्रशासन निर्भया के दोषियों के मामले में कोई चांस नहीं लेना चाह रहा।

याकूब मेमन की फांसी के बाद पहली बार दी जाएगी फांसी
मुंबई धमाकों के गुनहगार याकूब मेमन के बाद देश में किसी को फांसी की सजा नहीं दी गई है। इसलिए निर्भया के दोषियों को होने वाली फांसी की सजा को लेकर बहुत तरह की चर्चाएं हो रही हैं। मेमन को नागरपुर सेंट्रल जेल में फांसी के तख्ते पर लटकाया गया था। निर्भया गैंगरेप और उसकी हत्या के गुनहगार दिल्ली के तिहाड़ जेल में कैद हैं, जहां जेल प्रशासन ने अपनी ओर से उनकी सजा की तामील के लिए सारी तैयारियां पहले से ही पूरी करके रखी गई हैं।

16 दिसंबर,2012 की घटना से हिल गया था देश
सात साल से भी पहले 16 दिसंबर, 2012 की रात 23 साल की पैरामेडिकल की स्टूडेंट निर्भया के साथ 6 लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था और उसके शरीर के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी थीं। निर्भया को इन दरिदों ने जघन्य वारदात के बाद उसके मित्र के साथ चलती बस से दक्षिणी दिल्ली के इलाके में नीचे फेंक दिया था। इस घटना को लेकर दिल्ली समेत पूरे देश में जन-आक्रोश उमड़ पड़ा। बाद में निर्भया ने सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस केस के 6 में से एक आरोपी ने ट्रायल के दौरान ही जेल में ही खुदकुशी कर ली थी। जबकि, छठा आरोपी नाबालिग होने की वजह से बाल सुधार गृह में मामूली समय गुजार कर बरी हो चुका है। अब निर्भया के माता-पिता समेत पूरा देश उन बचे हुए चारों गुनहगारों की सजा-ए-मौत का इंतजार कर रहा है।












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