दोषी अक्षय की फांसी बरकरार रहने पर क्या बोलीं निर्भया की मां

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    Nirbhaya case: SC verdict के बाद Akshay Thakur के वकील और निर्भया की मां ने ये कहा |वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप के दोषियों में से एक अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। बुधवार को सर्वोच्च अदालत ने अक्षय की अर्जी खारिज करते हुए उसकी फांसी की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट के फैसले पर निर्भया की मां आशा देवी ने कहा है कि वो अदालत के फैसले से बहुत खुश हैं। आशा देवी ने दोषियों को जल्दी से जल्दी फांसी की मांग की थी।

    nirbhaya mother Asha Devi after Supreme Court rejects review petition of convict Akshay

    अक्षय की पुनर्विचार याचिका को जस्टिस भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोपन्ना की बेंच ने खारिज किया है। निर्भया बलात्कार मामले में दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखने के शीर्ष अदालत के 2017 के फैसले के खिलाफ एक दोषी अक्षय कुमार सिंह ने पुनर्विचार याचिका दायर की थी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने पिछले साल नौ जुलाई को इस मामले के अन्य तीन दोषियों मुकेश, पवन और विनय की पुनर्विचार याचिक खारिज कर दी थी।

    दोषी की आरे से पेश हुए वकील ए. पी सिंह ने अदालत से कहा कि फांसी की सजा को भारत में खत्म कर देना चाहिए। फांसी अपराध को मारता है, अपराधी को नहीं। सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि उनके पास इस मामले में कुछ नए तथ्य हैं। उनके मुवक्किल को मीडिया, जनता और राजनीतिक दवाब की वजह से दोषी ठहराया गया। ऐसे में उसकी फांसी की सजा को टाला जाए।

    वहीं दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा कि कई ऐसे अपराध होते हैं जहां भगवान पीड़िता को ना बचाने और ऐसे दरिंदे को बनाने के लिए शर्मसार होते होंगे। ऐसे अपराधों में मौत की सजा को कम नहीं करना चाहिए।

    16 दिसंबर, 2012 में 6 लोगों ने दिल्ली में चलती हुई बस में 23 साल की पैरामेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप किया गया था। गैंगरेप के बाद इन्होंने पीड़िता के निजी अंगों को लोहे की रॉड से आघात किया था। इसके बाद पीड़िता और उसके दोस्त को बस से फेंक दिया गया था। बुरी तरह जख्मी पीड़िता ने इलाज के दौरान अस्पताल में दम तोड़ दिया था। केस में कोर्ट ने 4 को फांसी की सजा सुनाई थी।

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