निर्भया केस: दोषी के वकील ने SC में कहा- खत्म हो फांसी की सजा, ये भारतीय संस्कृति के खिलाफ
नई दिल्ली। निर्भया केस में मौत की सजा पाए चार दोषियों में से एक अक्षय सिंह की पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। इस दौरान दोषी के वकील एपी सिंह ने दिल्ली पुलिस की जांच और गवाह अवनींद्र पांडेय के बयान पर सवाल खड़े किए। वकील ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और इस केस में उसे केवल फंसाया गया है। वकील ने कहा कि इस मामले में अभी भी मीडिया का दबाव है। वकील ने साथ ही सवाल उठाए कि दोषियों को फांसी देने की इतनी जल्दी क्यों है?
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केस में अब उनके पास नए तथ्य- वकील
कोर्ट में दलील रखते हुए वकील ने कहा कि इस केस में अब उनके पास नए तथ्य हैं, इस पर अदालत ने कहा कि फैसला आने के बाद अब नए फैक्ट कहां से आए। सुनवाई के दौरान वकील ने तिहाड़ के जेलर सुनील गुप्ता की किताब का जिक्र किया और कहा कि उसमें राम सिंह की आत्महत्या पर सवाल उठाए गए थे। इसपर जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि ये सारी बातें उन्होंने ट्रायल के दौरान क्यों नहीं बताईं। ट्रायल पूरा होने के बाद कोई किताब लिखे, ये खतरनाक ट्रेंड है। सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा कि जस्टिस भूषण ने कहा कि बाद में कोई कुछ भी लिख दे इसका कोई मतलब नहीं बनता।

गवाह पर भी वकील ने उठाए सवाल
एपी सिंह ने गुरुग्राम के एक छात्र की हत्या के मामले का हवाला देते हुए कहा कि अगर सीबीआई जांच ना होती तो सच सामने नहीं आता। इसलिए हमने भी सीबीआई जांच की मांग की थी। पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के दौरान वकील ने कहा कि भारत में मृत्युदंड को खत्म किया जाना चाहिए, अक्षय को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। वो लड़का एकमात्र गवाह था और उसकी गवाही मायने रखती है। वो पैसे लेकर मीडिया को इंटरव्यू दे रहा था। इस पर कोर्ट ने कहा कि इन बातों का क्या मतलब है।

टीआईपी टेस्ट के सवाल पर जज ने क्या कहा
दोषी के वकील ने टीआईपी टेस्ट (टेस्ट इन परेड) को लेकर सवाल उठाए तो जस्टिस भानुमति ने कहा कि इस तथ्य पर विचार किया जा चुका है। तब एपी सिंह ने कहा कि ये नया फैक्ट है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केस में ट्रायल पूरा होने के बाद कोई किताब लिखे, इसका कोई मतलब नहीं। कोर्ट ने कहा कि टीआईपी का मामला पहले भी सामने आया था। किताब अदालत के फैसले के बाद आई। सुनवाई पूरी होने के बाद कल को कोई कुछ भी लिखेगा तो क्या कोर्ट इसे सबूत मान लेगा। कोर्ट ने कहा कि ये बहुत खराब ट्रेंड है।

वकील ने दिया मानवाधिकारों का हवाला
सिंह ने फिर कहा कि मौत की सजा मानवाधिकारों और भारतीय संस्कृति के खिलाफ है। दिल्ली में हवा गैस चैंबर की तरह हो गई है, मौत की सजा क्यों? वकील ने कहा कि इसलिए मौत की सजा दी जा रही है कि मैं (अक्षय) गरीब हूं। फांसी की सजा पर सवाल उठाते हुए वकील ने कहा कि इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है। इसपर सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ये मौत की सजा के लिए फिट केस है। ये रेयरेस्ट ऑफ रेयर केस है और दोषी किसी तरह की सहानुभूति का हकदार नहीं है। उसे मौत की सजा होनी चाहिए और उसकी याचिका खारिज होनी चाहिए।












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