निर्भया केस: किसी भी दिन दी जा सकती है चारों दरिंदों को फांसी, बक्सर जेल से मंगाई गईं 10 नई रस्सियां

नई दिल्ली। 2012 के दिल्ली गैंगरेप-मर्डर केस में दोषियों को फांसी पर लटकाने को लेकर फैसला किसी भी वक्त आ सकता है। चारों दोषियों की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। हालांकि, इस बीच तिहाड़ जेल में फांसी की तैयारी शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि चारों दोषियों का डेथ वारंट कभी भी आ सकता है। ऐसे में तिहाड़ जेल प्रशासन द्वारा बिहार के बक्सर जेल से मंगाई जा रही रस्सियों से मेरठ के पवन जल्लाद से दोषियों को फांसी दिए जाने की पूरी तैयारी कर ली गई है। इसकी जानकारी तिहाड़ जेल के अधिकारी ने दी है।

फांसी देने को लेकर तैयारी शुरू- जेल अधिकारी

फांसी देने को लेकर तैयारी शुरू- जेल अधिकारी

नाम ना छापने की शर्त पर जेल अधिकारी ने बताया कि फांसी देने को लेकर सारी तैयारियां कर ली गई हैं। फांसी कोठरी का भी निरीक्षण किया गया है। उन्होंने बताया, '10 नई रस्सियां बक्सर जेल से मंगाई गई हैं। हम तैयारी कर रहे हैं ताकि समय पर सारे इंतजाम पूरे हो जाएं। बक्सर जेल में कैदियों द्वारा ये रस्सी बनाई जाती है। ये रस्सियां एक विशेष प्रकार की होती हैं और इन्हें फांसी के दौरान टूटना नहीं चाहिए और ना ही गले को काटना चाहिए। हमारे पास कुछ पुरानी रस्सियां थीं लेकिन हम कोई चांस नहीं लेना चाहते।'

बक्सर जेल से 10 नई रस्सियां मंगाई गईं

बक्सर जेल से 10 नई रस्सियां मंगाई गईं

23 साल की निर्भया से गैंगरेप के केस में पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर, विनय शर्मा और मुकेश सिंह को अदालत ने दोषी ठहराया था और इनको फांसी की सजा सुनाई थी। इस केस में पांचवे आरोपी राम सिंह ने जेल में ही आत्महत्या कर ली थी। जबकि छठे नाबालिग को आरोपी को बाद में रिहा कर दिया गया था। जेल प्रशासन ने हालांकि, ये संकेत नहीं दिया कि फांसी कब दी जाएगी। जेल प्रशासन ने चारों को दया याचिका दायर करने का नोटिस दिया था क्योंकि इन्होंने सारे कानूनी विकल्प इस्तेमाल कर लिए हैं।

किसी भी वक्त आ सकता है फांसी पर लटकाने का फैसला

किसी भी वक्त आ सकता है फांसी पर लटकाने का फैसला

पिछले महीने, चार दोषियों में से एक विनय शर्मा द्वारा साइन की गई दया याचिका पहले राज्य सरकार और फिर उपराज्यपाल (एलजी) को भेजी गई थी। राज्य के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन और एलजी ने याचिका को खारिज करने के साथ राष्ट्रपति के कार्यालय में फाइल भेजने की सिफारिश की थी। गृहमंत्रालय ने भी राष्ट्रपति से दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश की थी। इस बीच दोषी की तरफ से एक और याचिका भेज कर दया याचिका वापस लेने की गुहार लगाई गई थी।

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