जेल डॉक्टर ने मृत घोषित किए निर्भया के चारों दोषी, अब इसके बाद आगे क्या होगा?

जेल डॉक्टर ने जांच के बाद निर्भया के चारों दोषियों को मृत करार दे दिया। जानिए, अब इसके बाद क्या होगा...

नई दिल्ली। सात साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दिल्ली के बसंत विहार गैंगरेप मामले में निर्भया को इंसाफ मिल गया। शुक्रवार सुबह 5:30 बजे तिहाड़ जेल के अंदर निर्भया के चारों दोषियों को एक साथ फांसी दे दी गई। इससे पहले रातभर कोर्ट की कार्यवाही चली और निर्भया के दोषियों के वकीलों ने उन्हें फांसी के फंदे से बचाने की कोशिश की। हालांकि वकीलों की दलील काम नहीं आई और निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया। फांसी पर लटकाए जाने के बाद जेल डॉक्टर ने जांच की और निर्भया के चारों दोषियों को मृत करार दे दिया। जानिए, अब इसके बाद क्या-क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

अब आगे क्या-क्या होगा

अब आगे क्या-क्या होगा

निर्भया के चारों दोषियों को फांसी दिए जाने के बाद तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल ने बताया कि डॉक्टर ने चारों की जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया है। डॉक्टर की तरफ से मौत की पुष्टि किए जाने के बाद अब जेल अधीक्षक, उस डेथ वारंट पर साइन करेंगे, जो कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी के लिए जारी किया था। इसके बाद डॉक्टर चारों दोषियों का डेथ सर्टिफिकेट जारी करेंगे और इस डेथ सर्टिफिकेट को डेथ वारंट के साथ कोर्ट वापस भेजकर बताया जाएगा कि दोषी को फांसी दे दी गई है।

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    डेथ वारंट के फॉर्म नंबर 42 के आधार पर दी गई फांसी

    डेथ वारंट के फॉर्म नंबर 42 के आधार पर दी गई फांसी

    आपको बता दें कि बीते 5 मार्च को निर्भया के चारों दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी होने के बाद उन्हें आज तिहाड़ जेल में तय समय पर फांसी दे दी गई थी। इसी डेथ वारंट में एक फॉर्म नं- 42 होता है, जिमसें फांसी देने का पूरा ब्यौरा लिखा होता है। 'दोषी को तब तक गर्दन से फांसी पर लटकाया जाए, जब तक वह मर ना जाए', यह लाइन डेथ वारंट के इस फॉर्म नंबर 42 में ही दूसरे पैरा में लिखी होती है।

    क्या क्या लिखा होता है डेथ वारंट में

    क्या क्या लिखा होता है डेथ वारंट में

    दरअसल सीआरपीसी (दंड प्रक्रिया संहिता) के तहत फॉर्म-42 फांसी की सजा पाए किसी दोषी को फांसी पर लटकाने का आदेश होता है। फॉर्म-42 उस जेल के जेलर को संबोधित करते हुए जारी किया जाता है, जिस जेल में दोषियों को फांसी दी जानी है। इस फॉर्म की पहली ही लाइन में उन दोषियों के नाम लिखे होते हैं, जिन्हें फांसी पर लटकाया जाना है। इसके बाद इस फॉर्म में केस नंबर लिखा होता है।

    'दोषी को तब तक गर्दन से फांसी पर लटकाया जाए, जब तक...'

    'दोषी को तब तक गर्दन से फांसी पर लटकाया जाए, जब तक...'

    डेथ वारंट के फॉर्म-42 में इसके बाद उस तारीख का जिक्र किया जाता है, जिस दिन दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी होता है। इसके बाद दोषियों को फांसी दिए जाने की तारीख लिखी होती है। इसके अगले पैरा में लिखा होता है- 'दोषी को तब तक गर्दन से फांसी पर लटकाया जाए, जब तक वह मर ना जाए'। इसके बाद दोषियों को फांसी दिए जाने का समय और जगह लिखी होती है। फॉर्म-42 में सबसे नीचे की तरफ तारीख के साथ उस जज के हस्ताक्षर होते हैं, जो डेथ वारंट जारी करते हैं।

    कब जारी होता है डेथ वारंट

    कब जारी होता है डेथ वारंट

    आपको बता दें कि डेथ वारंट यानी ब्लैक वारंट, फांसी की सजा पाए किसी भी दोषी के खिलाफ उस वक्त जारी किया जाता है, जब न्यायिक प्रक्रिया पूरी हो जाती है और दोषी की सभी अपील खारिज हो जाती हैं। राष्ट्रपति की तरफ से दया याचिका ठुकराए जाने के बाद जेल प्रशासन ब्लैक वारंट के लिए कोर्ट जाता है। ब्लैक वारंट जारी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक, जेल अधिकारी दोषियों और उनके परिजनों को फांसी के बारे में जानकारी देते हैं। ब्लैक वारंट जारी होने के बाद दोषी की इच्छा पर उसके परिजनों के साथ उसकी मुलाकात कराई जाती है।

    7 साल बाद मिला निर्भया को इंसाफ

    7 साल बाद मिला निर्भया को इंसाफ

    दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को अपने घर लौट रही 23 वर्षीय छात्रा से बस के अंदर गैंगरेप के मामले में 6 लोगों को दोषी ठहराया गया था। इस घटना के कुछ दिन बाद छात्रा की मौत हो गई और लोगों ने सड़कों पर उतरकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर विरोध प्रदर्शन किए। दोषी ठहराए गए 6 लोगों में से एक राम सिंह ने ट्रायल के दौरान तिहाड़ जेल में खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक दोषी नाबालिग था। इसके बाद बाकी चार दोषियों को आज सुबह फांसी दे दी गई।

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