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निर्भया केस: रेप और मर्डर 16 साल पहले हुई थी आखिरी फांसी, 9 साल तक गुम रही थी फाइल

नई दिल्ली। आखिरकार निर्भया को सात साल के बाद इंसाफ मिल ही गया। उसके साथ दरिंदगी करने वाले चारों दोषियों को फांसी पर लटका दिया गया है। तीन बार डेथ वारंट कैंसिल होने के बाद 20 मार्च को निर्भया को इंसाफ मिल सका। आपको जानकर हैरानी होगी कि देश रेप और मर्डर जैसे क्राइम के लिए आखिरी बार किसी दोषी को 16 साल पहले फांसी पर लटकाया गया था। इसके अलावा यह बात और भी ज्‍यादा परेशान करने वाली है कि उस दोषी को फांसी देने में 14 साल का समय लग गया था। आइए आपको बताते हैं कि कौन था वह राक्षस जिसे देश में निर्भया केस से पहले आखिरी बार किसी रेप केस में फांसी दी गई थी।

14 साल बाद मिली फांसी

14 साल बाद मिली फांसी

धनजंय चटर्जी यह नाम था उस राक्षस का जिसे अगस्‍त 2004 में रेप और हत्‍या के केस में फांसी पर लटकाया गया था। चटर्जी ने पांच मार्च 1990 को स्‍कूल जाने वाली 14 साल की बच्‍ची हेतल पारीख का पहले रेप किया और फिर उसकी हत्‍या कर दी थी। 14 साल तक जेल की सजा काटने के बाद उसे फांसी पर लटकाया गया। जो वजह उस समय बताई गई थी उसे जानकर तो अफसोस भी होता है और गुस्‍सा भी आता है। कहा गया कि सरकार को करीब एक दशक तक इस केस की याद ही नहीं आई और इसलिए यह लटका रहा।

राष्‍ट्रपति कलाम ने नहीं मानी दया याचिका

राष्‍ट्रपति कलाम ने नहीं मानी दया याचिका

26 जून 2004 को धनजंय को फांसी दिया जाना तय हुआ मगर उसका परिवार सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा और साथ ही तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति एपीजे अब्‍दुल कलाम के पास भी दया याचिका दायर कर दी गई। 26 जून 2004 को पश्चिम बंगाल के तत्‍कालरन मुख्‍यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की पत्‍नी मीरा भट्टाचार्य की तरफ से फांसी की पहल के लिए कैंपेन लॉन्‍च किया गया। कई मानवाधिकार संगठन और व्‍यक्तियों की तरफ से धनजंय की फांसी का विरोध किया गया। आखिरकार चार अगस्‍त 2004 को राष्‍ट्रपति कलाम आखिरकार दया याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद 14 अगस्‍त 2004 को धनजंय को अलीपुर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी।

बर्फ की सिल्‍ली से मासूम की हत्‍या

बर्फ की सिल्‍ली से मासूम की हत्‍या

अलीपुर सेंट्रल जेल में भी 13 साल के बाद किसी दोषी को फांसी पर लटकाया गया था। धनजंय आखिरी समय तक अपने गुनाह को मानने से इनकार करता रहा था। पीड़‍िता कोलकाता के वेलैंड गोल्‍डस्मिथ स्‍कूल की छात्रा थी। वह भवानीपुर के आनंद अपार्टमेंट्स के थर्ड फ्लोर पर अपने माता-पिता और बड़े भाई के साथ रहती थी। पारिख फैमिली साल 1987 में इस अपार्टमेंट में रहने आई थी और धनजंय यहां पर सिक्‍योरिटी गार्ड के तौर पर काम करता था। मार्च में जब हेतल अपना एग्‍जाम देकर घर लौटी और उसकी मां अपार्टमेंट में ही बने एक मंदिर गई, उसी समय धनजंय ने पहले उसका रेप किया और फिर उसका मर्डर कर दिया। बताया जाता है कि धनजंय ने बर्फ की सिल्‍ली से हेतल को मारा था।

नौ साल तक सरकार रही अनजान

नौ साल तक सरकार रही अनजान

16 मार्च 1994 में धनजंय के वकील केस के रिव्‍यू के लिए हाई कोर्ट पहुंचे थे। कोर्ट ने उस समय उसे मिली हुई मौत की सजा पर रोक लगा दी थी। नवंबर 2003 तक सरकार का ध्‍यान इस केस पर था ही नहीं। फिर जब राज्‍य सरकार के कानून विभाग की ओर से कुछ फाइल्‍स खंगाल जा रही थी तो उसी समय धनजंय की फाइल पर नजर पड़ी। सरकार ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर पूछा था कि अभी तक स्‍टे हटाया क्‍यों नहीं गया।

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