पश्चिम बंगाल में 25 साल बाद लौटा जानलेवा वायरस! 70% है डेथ रेट, अलर्ट मोड पर केंद्र और राज्य सरकार
Nipah Virus in West Bengal Suspected Cases: क्या भारत एक बड़े संकट की दहलीज पर खड़ा है? कोरोना की खौफनाक यादें अभी पूरी तरह से मिटी नहीं कि पश्चिम बंगाल से आई एक खबर ने पूरे देश को डरा दिया है। करीब 25 साल के लंबे अंतराल के बाद, बंगाल में 'निपाह वायरस' (Nipah Virus) के संदिग्ध मामले सामने आए हैं।
यह कोई साधारण बुखार नहीं, बल्कि एक ऐसा दुश्मन है जिसका मृत्यु दर (70%) किसी भी अन्य सामान्य वायरस से कहीं ज्यादा खतरनाक है। अस्पताल के बेड पर वेंटिलेटर के सहारे सांसें ले रहे दो स्वास्थ्य कर्मियों ने न केवल डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि राज्य और केंद्र सरकार को भी आपातकालीन बैठकें करने पर मजबूर कर दिया है।

Nipah Virus in West Bengal: क्या है पूरा मामला?
दरअसल, ये मामला उत्तर 24 परगना जिले के बारासात में स्थित एक प्राइवेट अस्पताल का है। यहां काम करने वाले दो नर्स (एक महिला और एक पुरुष) अचानक गंभीर रूप से बीमार हो गए। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों नर्सों की स्थिति बेहद नाजुक है और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम यानी वेंटिलेटर पर रखा गया है।
Nipah Virus Cases: क्या दोनों की है कोई ट्रैवल हिस्ट्री?
बताया जा रहा है कि दिसंबर के महीने में ये दोनों कर्मचारी अपने पैतृक घर (पूर्वी मिदनापुर और पूर्व बर्धमान) गए थे। वहां से लौटने के बाद ही इनमें निपाह जैसे घातक लक्षण देखे गए।
Nipah Virus Update: मामले में लेटेस्ट अपडेट क्या है?
दोनों में मिले लक्षणों के आधार पर यह निपाह का मामला लग रहा है, लेकिन इसकी अंतिम पुष्टि के लिए इनके सैंपल नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV), पुणे भेजे गए हैं।
केंद्र और राज्य सरकार का 'जॉइंट मिशन'
इस खबर के बाहर आते ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बात की और स्थिति का जायजा लिया। केंद्र ने राज्य को हर संभव तकनीकी और रसद सहायता का आश्वासन दिया है।
- NJORT की तैनाती: केंद्र की एक स्पेशल टीम (National Joint Outbreak Response Team) को तुरंत बंगाल के लिए रवाना कर दिया गया है ताकि वायरस को फैलने से रोका जा सके।
- कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग: बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती ने बताया कि संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू कर दी गई है। पूर्वी बर्धमान, पूर्वी मिदनापुर और उत्तर 24 परगना के स्वास्थ्य अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है।
25 साल पुराना इतिहास और खौफनाक आंकड़े
पश्चिम बंगाल के लिए निपाह नया नहीं है, लेकिन इसकी वापसी डरावनी है।
- 1. 2001 का सिलीगुड़ी प्रकोप: भारत में निपाह का पहला मामला 2001 में सिलीगुड़ी में मिला था। तब इसकी भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संक्रमित होने वाले 66 में से 45 लोगों की मौत हो गई थी।
- 2. मृत्यु दर: कोरोना वायरस का मृत्यु दर 2-3% के आसपास था, जबकि निपाह का मृत्यु दर 40% से 70% के बीच रहता है। यानी हर 10 संक्रमितों में से 7 की जान जाने का खतरा रहता है।
Nipah Virus Symptoms: कैसे फैलता है यह मौत का जाल?
निपाह वायरस मुख्य रूप से फ्रूट बैट्स (Pteropus bats) यानी फल खाने वाले चमगादड़ों में पाया जाता है।
- संक्रमण का जरिया: यदि कोई इंसान चमगादड़ की लार या मूत्र से दूषित फल खाता है, या संक्रमित सूअर/मवेशी के संपर्क में आता है, तो वह बीमार पड़ सकता है।
- इंसान से इंसान: यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के शरीर से निकलने वाले तरल पदार्थ (पसीना, लार, रक्त) के जरिए दूसरे इंसान में भी प्रवेश कर सकता है।
निपाह के शुरुआती लक्षण (जिन्हें नजरअंदाज न करें):
डॉक्टरों के अनुसार, इसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे लगते हैं, जो बाद में जानलेवा हो जाते हैं:
- अचानक तेज बुखार और सिरदर्द।
- गले में खराश और मांसपेशियों में दर्द।
- चक्कर आना और मानसिक भ्रम (Encephalitis)।
- गंभीर स्थिति में सांस लेने में तकलीफ और कोमा।
Nipah Virus Prevention: क्या करें और क्या न करें?
जब तक पुणे की लैब से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक ये सावधानियां बरतें:
1. गिरे हुए फल न खाएं: जमीन पर गिरे हुए या पक्षियों द्वारा कुतरे गए फलों को भूलकर भी न छुएं।
2. खजूर का रस: कच्चे खजूर का रस पीने से बचें, क्योंकि चमगादड़ अक्सर रात में इसे दूषित कर देते हैं।
3. हाथों की सफाई: नियमित रूप से साबुन और सैनिटाइज़र का उपयोग करें।












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