Nipah Virus:'बांग्लादेश स्ट्रेन' ने बढ़ाई टेंशन! केरल में 5 मामले, वायरस से निपटने की क्या है तैयारी? जानिए
बांग्लादेश में फैले निपाह वायरल पांच ताजा मामले केरल में आए हैं। राज्य को कोझिकोड जिले में एक स्वास्थ्यकर्मी भी इन संक्रमितों में शामिल है। संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिले में अवकाश घोषित किया गया है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बुधवार को कहा कि निपाह वायरस का पांचवां मामला 24 वर्षीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता का है जो कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में कार्यरत है।
केरल में स्वास्थ्यकर्मी के संक्रमण के बाद चिंता बढ़ गई है। ऐसे में स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने एक बयान में कहा है कि आईसीएमआर के साथ मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का ऑर्डर दिया है और इसे जल्द ही कोझिकोड लाया जाएगा। एक्सपोर्टेड दवा आईसीएमआर के पास पहले से ही उपलब्ध है। उन्होंने बताया् कि संक्रमति युवक कोझिकोड के एक अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

उत्तरी केरल में निपाह के संभावित प्रकोप के मद्देनजर गुरुवार और शुक्रवार को सभी शैक्षणिक संस्थानों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। कोझिकोड जिला कलेक्टर ने फेसबुक पोस्ट जरिए इसकी घोषणा की। कोझिकोड जिला कलेक्टर ए गीता ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान छात्रों के लिए दो दिनों में ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था कर सकते हैं। हालांकि, विश्वविद्यालय परीक्षा कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा।
केरल में निपाह से निपटने की तैयारी
केरल में घातक संक्रमण निपाह से निपटने की पूरी तैयारी है। स्वस्थ्य मंत्री बीना जॉर्ज के मुताबिक कुछ अहम तैयारियां की गई हैं, जिनके जरिए वायरल पर प्रभावी रूप से नियंत्रण पाया जा सकेगा।
- 76 लोग उच्च जोखिम वाले संपर्क श्रेणी में हैं। हालांकि, इन सभी लोगों की हालत स्थिर बनी हुई है।
- निपाह के हल्के लक्षण वाले 13 व्यक्तियों की अब अस्पताल में निगरानी की जा रही है, और केवल बच्चा गहन चिकित्सा इकाई में है।
- नमूनों का परीक्षण कोझिकोड मेडिकल कॉलेज और थोन्नक्कल वायरोलॉजी लैब की प्रयोगशालाओं में नियमित रूप से किया जाता है। तीव्र लक्षणों वाले लोगों के नमूने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे भेजे जाएंगे।
- जिला कलेक्टर्स को 24 सितंबर तक कोझिकोड में सामूहिक समारोहों से बचने का निर्देश देने वाले आदेश जारी करने के लिए अधिकृत किया गया है।
- क्षेत्र के लोगों की मदद से कन्टेनमेंट जोन में स्वयंसेवी टीमें गठित की जाएंगी और इन व्यक्तियों का चयन पंचायतों द्वारा किया जाएगा।
- निपाह रोगियों के संपर्क में आए 156 स्वास्थ्य कर्मियों में से कोई भी उच्च जोखिम वाली श्रेणी में नहीं है, क्योंकि उन्होंने बुनियादी संक्रामक रोग नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन किया था।
- जो भी मरीज एन्सेफलाइटिस के लक्षणों के साथ आता है, उसका संभावित निपाह वायरस संक्रमण के लिए परीक्षण किया जाता है।
- वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक सावधानी बरतनी होगी, निपाह वायरस का नवीनतम मामला जंगल क्षेत्र के पांच किलोमीटर के भीतर उत्पन्न हुआ।
- 200 से अधिक व्यक्तियों को कॉल सेंटर के माध्यम से परामर्श दिया गया है।
- केंद्रीय टीम के कुछ सदस्य पहले ही कोझिकोड पहुंच चुके हैं और अन्य के गुरुवार को पहुंचने की उम्मीद है। केंद्र की टीम में एक चमगादड़ निगरानी इकाई भी शामिल है, जो गुरुवार को निषिद्ध क्षेत्रों का दौरा करेगी।
- एनआईवी, पुणे की टीमों के अलावा, महामारी विज्ञानियों का एक समूह सर्वेक्षण करने के लिए चेन्नई से केरल पहुंचेगा।
केरल में कन्टेनमेंट जोन
मंगलवार को घोषित किए गए वार्डों के अलावा, चार और वार्डों - विल्यापल्ली में तीन और कोझिकोड जिले के पुरमेरी पंचायत में एक को निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया है। स्थिति को देखते हुए कोझिकोड प्रशासन ने पहले ही सात ग्राम पंचायतों- अतानचेरी, मारुथोनकारा, तिरुवल्लुर, कुट्टियाडी, कयाक्कोडी, विल्यापल्ली और कविलुम्परा को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया है।
सबसे पहले कहां मिला निपाह?
निपाह वायरस (NIV) पहली बार 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सूअरों और वहां के निवासियों में पाया गया था। जिसके कारण लगभग 100 से अधिक मौतें हुई थीं। बीमारी के नियंत्रण के लिए करीब दस लाख से अधिक सूअरों को मार दिया गया था। 1999 के बाद से मलेशिया और सिंगापुर में इस वायरस के मामले नहीं मिले। लेकिन तब से एशिया के कुछ हिस्सों - मुख्य रूप से बांग्लादेश और भारत में लगभग हर साल मामले दर्ज किए जा रहे हैं।












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