वामपंथी विचारकों की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार आयोग का महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर NHRC का महाराष्ट्र सरकार को नोटिस

मुंबई। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में अलग-अलग शहरों से पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने लिया स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मामले को संज्ञान में लेते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी ने चार सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र सरकार से इस पर सफाई देने को कहा है।

मुंबई। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में अलग-अलग शहरों से पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने लिया स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर मामले को संज्ञान में लेते हुए महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया है। एनएचआरसी ने चार सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र सरकार से इस पर सफाई देने को कहा है। मंगलवार को पुणे पुलिस ने महाराष्‍ट्र, गोवा, दिल्‍ली, तेलंगाना और झारखंड में छापे मारकर वामपंथी विचारक वरवरा राव, पत्रकार गौतम नवलखा, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, सामाजिक कार्यकर्ता वेरनन गोंजालविस और स्‍टेन स्‍वामी को गिरफ्तार किया था। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर, देवकी जैन, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और माया दारूवाला कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। प्रशांत भूषण भी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस पर हमला बोला है, तो वहीं सीपीएम के सीताराम येचुरी नेवामपंथी विचारकों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अनैतिक बताते हुए इसके विरोध में वामदल और सभी प्रगतिशील संगठनों की ओर से जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पुणे पुलिस के मुताबिक, इन कार्यकर्ताओं पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन से लिंक होने का आरोप है। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने के लिए की गई कार्रवाई बता रहे हैं। महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री दीपक केसरकर ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर कहा है कि जो भी गिरफ्तारियां हुई हैं, वह सबूतों के आधार पर हुई हैं। अगर सबूत नहीं होते तो कोर्ट कस्टडी नहीं देता।

मंगलवार को पुणे पुलिस ने महाराष्‍ट्र, गोवा, दिल्‍ली, तेलंगाना और झारखंड में छापे मारकर वामपंथी विचारक वरवरा राव, पत्रकार गौतम नवलखा, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, सामाजिक कार्यकर्ता वेरनन गोंजालविस और स्‍टेन स्‍वामी को गिरफ्तार किया था।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में इतिहासकार रोमिला थापर, देवकी जैन, प्रभात पटनायक, सतीश देशपांडे और माया दारूवाला कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। प्रशांत भूषण भी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।

गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरएसएस पर हमला बोला है, तो वहीं सीपीएम के सीताराम येचुरी ने वामपंथी विचारकों के खिलाफ की गई कार्रवाई को अनैतिक बताते हुए इसके विरोध में वामदल और सभी प्रगतिशील संगठनों की ओर से जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।

पुणे पुलिस के मुताबिक, इन कार्यकर्ताओं पर प्रतिबंधित माओवादी संगठन से लिंक होने का आरोप है। वहीं मानवाधिकार कार्यकर्ता इसे सरकार के विरोध में उठने वाली आवाज को दबाने के लिए की गई कार्रवाई बता रहे हैं। महाराष्ट्र के गृह राज्यमंत्री दीपक केसरकर ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर कहा है कि जो भी गिरफ्तारियां हुई हैं, वह सबूतों के आधार पर हुई हैं। अगर सबूत नहीं होते तो कोर्ट कस्टडी नहीं देता।

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