भारतीय प्रणाली को विफल दिखाने के उद्देश्य से काम कर रहा 'न्यूज क्लिक' पोर्टल- संबित पात्रा

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने न्यूज क्लिक पोर्टल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पोर्टल एक खास एजेंडे के तहत काम रहा है।

नई दिल्ली, 18 जुलाई। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने न्यूज क्लिक पोर्टल पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पोर्टल एक खास एजेंडे के तहत काम रहा है। उन्होंने कहा कि न्यूजक्लिक एक पोर्टल है, जो खुद को एक मीडिया हाउस के रूप में पेश करने की कोशिश करता है। इसने भारत की प्रणाली को विफल दिखाने और भारत में विदेशी प्रचार फैलाने के उद्देश्य से संदिग्ध तरीके से विदेशों से करोड़ों रुपए प्राप्त किये।

Sambit Patra

उन्होंने आगे कहाकि भारत की वैक्सीन पॉलिसी की तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है। जब से नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तब से कुछ लोग परेशान हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज न्यूज क्लिक को लेकर जो बात सामने आई है, उससे यह बात स्पष्ट है कि टूलकिट केवल भारत के कुछ राजनीतिक दल ही नहीं चला रहे हैं, बल्कि देश से बाहर भी ऐसी साजिश हो रही है, जो टूलकिट का हिस्सा है। न्यूज क्लिक पोर्टल विदेश से आए फंड का इस्तेमाल कर रहा है।

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आगे उन्होंने कहा कि, 'हमारे देश हमारी वैक्सीन नीति को बदनाम किया जाए, यह कुचेष्टा कुछ लोगों ने, कुछ संस्थाओं ने कुछ पोर्टल्स ने की है। ये विदेशी फंडिंग के माध्यम से हो रहा था। न्यूज क्लिक में बाहरी ताकतें फंड भेजती थीं। ये पीपीके नाम की कंपनी के अंतर्गत आती है। इन्होंने 9।59 करोड़ रुपये के एफडीआई को स्वीकार किया। इसमें मुख्य रूप से विदेश के 3 लोग सम्मिलित थे। इसके अलावा करीब 30 करोड़ रुपये इन्होंने विदेशों की अलग-अलग एजेंसियों से प्राप्त किया।'

उन्होंने आगे कहा कि 'मीडिया की चादर ओढ़कर पोर्टल चलाने वाले कुछ एक्टिविस्ट हैं, जिनके साथ कुछ विदेशी ताकतें हैं भारत के कुछ मेन स्ट्रीम के राजनेता भी हैं। इनका एक ग्रुप बना है। पूरे सामंजस्य के साथ ये काम करते हैं, इनका मकसद होता है देश में भ्रम, अराजकता फैलाना। पूरे विश्व में हमारी वैक्सीन नीति को लेकर सराहना की गई, वैक्सीन मैत्री को लेकर सराहना की गई।'

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जांच में कुछ अहम सबूत मिले हैं। इस पोर्टल और इसके प्रमोटरों ने श्रीलंका-क्यूबा मूल के एक कारोबारी नेविले रॉय सिंघम से एक करार किया था, जो शक के घेरे में है। इस पोर्टल को जो 38 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली थी, उसका प्रमुख स्रोत इसी कारोबारी को माना जा रहा है और इसका संबंध चीन से है।

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