अस्पतालों में जन्म के साथ ही नवजात को मिलेगा आधार नंबर, पूरी प्रक्रिया जानिए
नई दिल्ली, 22 दिसंबर: जल्द ही भारत में बच्चों को अस्पताल में उनके जन्म के साथ उनका आधार नंबर भी जारी कर दिया जाएगा। अमेरिका में यह व्यवस्था पुरानी है। लेकिन, अब भारत में भी इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। बता दें कि अभी देश की अधिकांश व्यस्क आबादी के पास आधार नंबर है। यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीईओ ने इसकी पूरी प्रक्रिया बताई है और यह भी गुजारिश की है कि जो लोग भी अपना मोबाइल और ईमेल को आधार से नहीं लिंक करवा पाए हैं, वह जल्द करवा लें, क्योंकि इससे उन्हें मिलने वाली सेवाएं और आसान हो जाएंगी।

जन्म के साथ ही 'आधार'
जन्म के साथ ही 'आधार'। भारत में भी अमेरिका की तर्ज पर नवजातों को अस्पताल में ही आधार रजिसट्रेशन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने वाली है। प्रसार भारती न्यूज सर्विस के मुताबिक इसके लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (यूआईडीएआई) जन्म पंजीयक (रजिस्ट्रार ऑफ बर्थ) के साथ तालमेल कर रहा है, ताकि शिशुओं को आधार नंबर तत्काल उपलब्ध करवाई जा सके। सरकारी अधिकारियों के अनुसार भारत में हर साल 2 से 2.5 करोड़ बच्चों का जन्म होता है। अब यूआईडीएआई इन सबका जल्द ही जन्म के दौरान अस्पतालों में ही आधार रजिस्टर्ड करने की कोशिशों में जुट गया है।

131 करोड़ से अधिक आबादी के पास आधार
देश में बच्चों को आधार में नामांकन करवाने का क्या तरीका है, इसके बारे में यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीईओ डॉक्टर सौरभ गर्ग ने विस्तार से जानकारी देते हुए पूरी प्रक्रिया समझायी है। उन्होंने कहा है, "पांच साल से कम उम्र में यह एक निरंतर प्रक्रिया है....जैसे ही नया जन्म होता है हम राज्य सरकार और विभिन्न अस्पतालों के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि सुनिश्चित हो जाए कि रजिस्ट्रेशन पूरी हो जाए।" यूआईडीएआई के सीईओ के मुताबिक इस समय देश में 18 साल से अधिक के 99.5 % से ज्यादा लोगों के पास आधार है, यह संख्या 131 करोड़ से ज्यादा है। 5 वर्ष से 18 वर्ष के बीच में भी 70 से 75% से ज्यादा लोगों के पास आधार नंबर है।

5 साल और 15 साल में अपडेट करवाना है आधार
दरअसल भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को आधार मिल सकता है। जो विदेशी भारत में रहते हैं, वह भी आधार ले सकते हैं। आधार नंबर तो फौरन जारी किया जा सकता है, लेकिन शून्य से 5 साल तक के बच्चों को बायोमेट्रिक नहीं लिया जाता। सिर्फ फोटोग्राफ, सामान्य डेमोग्राफिक जानकारी और उसके माता-पिता का आधार नंबर लिंक किया जाता है। जब बच्चा 5 साल का हो जाता है तो उसके फिंगर प्रिंट और आंख की पुतली को अपडेट करवाया जाता है और फोटो भी अपडेट हो जाती है। इसके बाद 15 साल की उम्र होने पर यह प्रक्रिया फिर से दोहरायी जाती है। तबतक बच्चे का फिंगर प्रिंट पूरी तरह से सेट हो चुका होता है, जिसमें कोई बदलाव नहीं होता।

मोबाइल नंबर से आधार लिंक करवाना क्यों है जरूरी ?
डॉक्टर सौरभ गर्ग ने मोबाइल नंबर और ई-मेल को आधार से लिंक करवाने पर बहुत ज्यादा जोर दिया है। उन्होंने कहा है, "जिसका भी मोबाइल नंबर आधार से लिंक नहीं है, मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि वह लिंक करवाएं तो उन्हें और बेहतर सर्विस मिल पाएगी। अब तो वेबसाइट पर भी आप अपडेट कर सकते हैं सबकुछ। मोबाइल ही नहीं आप अपना ई-मेल ए़ड्रेस भी लिंक कर सकते हैं। आपको कोई बदलाव करना है तो आप मोबाइल और ई-मेल के जरिए कर पाएंगे।"












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