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New Year 2025: BJP ने 2024 में NDA को किया मजबूत, कैसा रहने वाला है नया साल? 5 बड़ी चुनौतियां

New Year 2025: 25 दिसंबर (2024) को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एनडीए के सहयोगी दलों के नेताओं को दिल्ली में अपने घर पर हाई-टी पर आमंत्रित किया था। यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 100वीं जयंती का मौका था, जो एनडीए के सूत्रधार भी कहे जा सकते हैं। इस बैठक में सभी सहयोगी दल इस बात पर सहमत हुए कि बीआर अंबेडकर को मुद्दा बनाकर कांग्रेस बीजेपी पर जो हमला कर रही है, उसमें सभी एक भाषा में जवाब देंगें।

बैठक में सभी जरूरी मुद्दों पर मिलते रहने और संयुक्त रणनीति बनाने पर भी सहमति बनी। कुल मिलाकर एनडीए के दलों की एकजुटता नजर आई, जिसमें बीजेपी पूरी तरह से कमान संभालती दिखी। मौजूदा साल के लिए एनडीए की यह एकजुटता बीजेपी के लिए खास मायने रखने वाली है, क्योंकि इसी साल के अंत में बिहार विधानसभा का भी चुनाव होना है।

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New Year 2025: लोकसभा चुनावों के बाद एनडीए की एकता को मजबूत करने में सफल रही बीजेपी

कुछ महीने पीछे मुड़कर देखें तो लोकसभा चुनाव में जिस तरह से बीजेपी को अपने आप में पूर्ण बहुमत नहीं मिला और उसे सहयोगियों पर आश्रित रहना पड़ा, इस वजह से बीच में कुछ ऐसे मुद्दे सामने आए, जिससे लगा कि एनडीए को गाड़ी खींचने में दिक्कत हो सकती है।

यह चाहे अनुसूचित जाति के आरक्षण में सुप्रीम कोर्ट का वर्गीकरण वाला फैसला हो या वक्फ बिल की बात हो या फिर सरकारी सेवा में लेटरल एंट्री स्कीम। लेकिन, पार्टी ने सबको सुलझाया और सबको साथ लेकर आगे बढ़ती रही और सहयोगी भी मानते गए।

शुरू में जेडीयू और टीडीपी जैसी पार्टियों की ओर से अपने राज्यों को विशेष दर्जा देने को लेकर भी खिंचाव नजर आ रहा था। लेकिन, बाद में यही लगा कि दरअसल यह गठबंधन के सदस्यों के बीच 'मतभेद' था,'मनभेद' की स्थिति तक बात पहुंचने से पहले ही बीजेपी ने सबकी सुनकर और चर्चा करके उसे सुलझाने की कोशिश की और उसमें सफल भी हुई।

New Year 2025: वाजपेयी की भावना की तरह गठबंधन धर्म निभाने की कोशिश करती दिखी है बीजेपी

बीते शीतकालीन सत्र में बीजेपी तब सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में दिखी जब 'वन नेशनल, वन इलेक्शन' बिल पर सभी सहयोगी दलों को अपने साथ एकजुट रखा। बीजेपी ने सहयोगी दलों का दिल जीतने में कामयाबी हासिल की है, तो इसकी वजह ये हो सकती है कि उसने जरूरत पड़ने पर बड़ा दिल दिखाने से संकोच नहीं किया है।

झारखंड विधानसभा चुनाव पार्टी हार गई, लेकिन उसने जेडीयू और एलजेपी को उनके सियासी जनाधार से ज्यादा सीटें देने में भी हिचकिचाहट नहीं दिखाई।

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शुरू में महायुति में सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ा घमासान नजर आ रहा था। लेकिन, भाजपा के अंदर के लोग बताते हैं कि पार्टी ने कार्यकर्ताओं को इस बात के लिए मनाने की भरपूर कोशिश की कि वोट एनडीए को ही जाना चाहिए, चाहे पार्टी का कोई बागी क्यों न खड़ा हो। परिणाम यह रहा कि बीजेपी की स्ट्राइक रेट लगभग 90% रही और शिवसेना और एनसीपी की भी बल्ले-बल्ले हो गई।

New Year 2025: बीजेपी की पहली चुनौती-वक्फ बिल

वक्फ विधेयक के खिलाफ हवा बनाने में विपक्षी इंडिया ब्लॉक कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सरकार इस शीतकालीन सत्र में पारित करवाने का इरादा रखती थी, लेकिन संसद की संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को इसपर और समय मिल गया है। अगले सत्र में जब भी इसकी रिपोर्ट को संसद में पारित करने के लिए लाया जाएगा, तब इस मुद्दे पर सभी सहयोगियों को एकजुट रखना बीजेपी के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।

क्योंकि, विपक्ष वक्फ बिल को इस्लाम से जोड़ने की कोशिश में लगा हुआ है और जेडीयू, जेडीएस और टीडीपी जैसी पार्टियां वोट बैंक के लिहाज से इस मुद्दे पर सरकार के साथ बने रहेंगे या कोई सियासी पैंतरेबाजी दिखाएं, यह बहुत बड़ा सवाल है?

New Year 2025: भाजपा की दूसरी चुनौती- जाति जनगणना

बीजेपी के सामने सहयोगियों से डील करने में तब ज्यादा कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं, जब जनगणना की शुरुआत होगी। क्योंकि, पार्टी के अधिकतर सहयोगी जाति जनगणना की वकालत करते रहे हैं। पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू सिर्फ कौशल जनगणना पर जोर दे रहे थे।

लेकिन, अचानक उन्होंने इसके साथ ही जाति जनगणना की भी वकालत की है। बिहार में बीजेपी ने तो इसका समर्थन किया था, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर उसने अबतक ऐसी कोई इच्छा नहीं जताई है।

New Year 2025: बीजेपी की तीसरी चुनौती- यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)

इसी तरह से यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) एक ऐसा मुद्दा है, जिसपर बीजेपी शासित राज्यों ने तो कदम बढ़ाने शुरू भी कर दिए हैं और उत्तराखंड सरकार इसे लागू करने वाली है। हालांकि, पार्टी ने अभी तक इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का साफ संकेत नहीं दिया है।

लेकिन,अगर वह कोई ऐसा निर्णय करती है तो इस मामले में बिहार की सहयोगी पार्टियों के साथ-साथ आंध्र प्रदेश, कर्नाटक के सहयोगी दलों को एक मोर्चे पर लाने की चुनौती बनी रहेगी। आंध्र में टीडीपी और जनसेना के साथ उसका गठबंधन है और कर्नाटक में जेडीएस को साथ लेकर चल रही है।

New Year 2025: बीजेपी की चौथी चुनौती- तमिलनाडु चुनाव के लिए सियासी समीकरण बनाना

बीजेपी के लिए 2025 तमिलनाडु की राजनीति के लिए भी अहम साबित होने वाला है। यहां 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लोकसभा चुनावों में पार्टी अपने सबसे पुराने सहयोगियों में से एक एआईएडीएमके से अलग होकर चुनाव लड़ी थी और उसके बदले कई स्थानीय छोटे दलों के साथ तालमेल किया था। तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई ने हाल ही में संकेत दिया है कि पार्टी एआईएडीएमके के साथ फिर से गठबंधन कर सकती है। लेकिन, अन्नाद्रमुक ने फिलहाल उत्साह नहीं दिखाया है।

New Year 2025: बीजेपी की पांचवीं चुनौती- बिहार विधानसभा चुनाव

2025 में बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से बिहार विधानसभा चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण रहने वाला है। साल के अंत में वहां एनडीए जेडीयू की अगुवाई में चुनाव लड़ने वाला है। अभी तक तो यही लग रहा है कि बीजेपी वाला गठबंधन आरजेडी गठबंधन या इंडिया ब्लॉक के मुकाबले ज्यादा मजबूत है।

क्योंकि, वहां एलजेपी (राम विलास पासवान), हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा का गठबंधन जातीय समीकरण में काफी मजबूत लग रहा है। लेकिन, मुख्यमंत्री और जेडीयू सुप्रीमो नीतीश कुमार के किसी भी अगले सियासी स्टैंड का कोई भी अनुमान लगा पाना बहुत ही मुश्किल है।

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