फेसबुक पर आपकी फ्रेंडलिस्ट से ही कोई करे ऐसा मैसेज तो हो जाएं सावधान, वरना पड़ेगा पछताना

कहीं आपके फेसबुक पर भी तो नहीं आया ये मैसेज, हो जाएं सावधान वरना पड़ेगा पछताना...

नई दिल्ली। 'कैसे हो', ये मैसेज आज अचानक एक ऐसे परिचित की आईडी से मेरे फेसबुक मैसेंजर में आया, जिनसे पहले कभी मैसेंजर के जरिए बात ही नहीं हुई। माथा ठनका, फिर भी रिप्लाई में भाईसाब नमस्कार कहकर हाल-चाल पूछा। इसके बाद उधर से अगला मैसेज आया कि एक हेल्प चाहिए। पूछा कि क्या मदद चाहिए, तो दूसरी तरफ से मैसेज आया- अर्जेट कुछ पैसे चाहिएं, एक इमरजेंसी आ गई है, आप गूगल पे या फोन पे से 15 हजार रुपए भेज दो। बस, यहीं से मेरा शक यकीन में बदल गया कि ये फेसबुक आईडी किसी ने हैक कर ली है और अब फ्रेंडलिस्ट में शामिल लोगों से पैसे हड़पने के लिए ठगी की जा रही है।

डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बाद ठगी का नया तरीका

डेबिट और क्रेडिट कार्ड के बाद ठगी का नया तरीका

दरअसल, अभी तक आपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड के जरिए ही ऑनलाइन ठगी के बारे में सुना होगा, लेकिन अब एक नई तरह की ठगी के जरिए पैसे हड़पने का धंधा सामने आया है। पैसे हड़पने की ये ठगी ऐसी है कि आपको पहली बार में पता ही नहीं चलेगा कि सामने वाला आपको चूना लगा रहा है। इस नई ठगी में किसी की फेसबुक आईडी हैक की जाती है और उसके बाद उसकी फेंडलिस्ट में शामिल लोगों से मैसेंजर में कोई बहुत बड़ी मजूबरी बताकर पैसों की मांग की जाती है। कई बार लोग बातों में आ जाते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।

किन लोगों की आईडी हैक करना ज्यादा आसान

किन लोगों की आईडी हैक करना ज्यादा आसान

ऐसे अपराधों को रोकने के लिए बनाई गई यूपी पुलिस की साइबर सेल सपोर्ट टीम में तैनात विपिन कुमार पाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, 'उत्तर प्रदेश, दिल्ली और इससे सटे आस-पास के राज्यों में ऐसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जब इस तरह की ठगी के जरिए लोगों से पैसे हड़प लिए गए। हालांकि ऐसी घटनाओं के लिए काफी हद तक लोगों की लापरवाही ही जिम्मेदार होती है। इस तरह के अपराध का शिकार वो लोग ज्यादा होते हैं जो अक्सर अपने मोबाइल नंबर को ही अपना पासवर्ड बना लेते हैं। ऐसे लोगों की आईडी हैक करना साइबर अपराधियों के लिए बेहद आसान होता है।'

इस तरह के फेसबुक अकाउंट पर भी अपराधियों की नजर

इस तरह के फेसबुक अकाउंट पर भी अपराधियों की नजर

विपिन कुमार पाल ने बताया कि कई बार लोग साइबर कैफे में अपना फेसबुक अकाउंट खोलते हैं और गलती से पासवर्ड सेव का ऑप्शन सेलेक्ट कर लेते हैं। ऐसे में उनके फेसबुक अकाउंट की जानकारी कूकीज में सेव हो जाती है और शरारती तत्व इस लापरवाही का फायदा उठा लेते हैं। इनके अलावा कुछ लोग अपने नाम से कई आईडी बना लेते हैं और बाद में उन्हें ऐसे ही छोड़ देते है। साइबर अपराधियों की नजर ऐसे फेसबुक अकाउंट्स पर भी होती है और इनके जरिए वो ठगी को अंजाम देते हैं।

शिकार के लिए ऐसे की जाती है लोगों की पहचान

शिकार के लिए ऐसे की जाती है लोगों की पहचान

विपिन बताते हैं कि आमतौर पर किसी की भी फ्रेंडलिस्ट में 400-500 से ज्यादा ही फ्रेंड होते हैं। फेसबुक आईडी हैक करने वाला शख्स सबसे पहले उस आईडी की फ्रेंडलिस्ट के उन लोगों की लिस्ट बनाता है, जो इस आईडी की पोस्ट पर लगातार लाइक, कमेंट या शेयर करते रहते हैं। इसके बाद इन्हीं से ऐसे लोगों को चुना जाता है, जो महीने में एक-दो बार ही इस फेसबुक आईडी पर लाइक या कमेंट करते हैं। अपराधियों को इससे उन लोगों की पहचान हो जाती है, जो हैक किए गए फेसबुक यूजर के परिचित तो हैं, लेकिन उसके घर-परिवार के बारे में ज्यादा नहीं जानते। इससे फायदा ये होता है कि इन लोगों को परिवार की इमरजेंसी के नाम पर फंसाना आसान हो जाता है।

मैसेंजर में इसलिए मांगी जाती है छोटी रकम

मैसेंजर में इसलिए मांगी जाती है छोटी रकम

इसके बाद मैसेंजर में ऐसे लोगों को मैसेज भेजकर परिवार के किसी सदस्य की बीमारी या कोई और इमरजेंसी बताकर 5 हजार से लेकर 15 हजार रुपयों तक की मांग की जाती है। ये रकम ऐसी है कि सामने वाला ठगी का अंदाजा नहीं लगा पाता और बिना सोचे रुपए ट्रांसफर कर देता है। उसे लगता है कि 5-10 हजार रुपए ही तो हैं, बाद में वापस कर देगा। छोटी रकम मांगने के पीछे दूसरा बडा़ कारण ये भी है कि पीड़ित ये सोचकर पुलिस में शिकायत नहीं करेगा कि इतने से रुपयों के लिए क्या भागदौड़ करें।

पेटीएम, गूगल पे या फोन पे के जरिए मांगे जाते हैं रुपए

पेटीएम, गूगल पे या फोन पे के जरिए मांगे जाते हैं रुपए

पैसे ट्रांसफर के लिए पेटीएम, गूगल पे या फोन पे को जरिया बनाया जाता है। मैसेंजर में कहा जाता है कि मैं अस्पताल में हूं, कुछ पैसे कम पड़ रहे हैं और ये नंबर बिलिंग काउंटर का है। आगे कहा जाता है कि इस नंबर पर इतने रुपए भेज दो, मैं सुबह वापस कर दूंगा। एक बार जैसे ही उस नंबर पर पैसे ट्रांसफर हुए, उसके ठीक बाद नंबर बंद हो जाता है। और, जब तक इस ठगी का पता चलता है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

इस तरह की ठगी से कैसे बचें

इस तरह की ठगी से कैसे बचें

इस तरह की ठगी से बचने के लिए विपिन कुमार बताते हैं कि लोगों को अपने मोबाइल नंबर को अपना फेसबुक पासवर्ड बनाने से बचना चाहिए। इसके अलावा दूसरी सामान्य जानकारी जैसे- जन्मतिथि, अपना नाम, पैनकार्ड नंबर आदि भी फेसबुक पासवर्ड के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। जब तक पासवर्ड मजबूत रहेगा, आपका फेसबुक अकाउंट हैक नहीं हो सकता। इसके अलावा साइबर कैफे में अपना फेसबुक अकाउंट या नेट बेकिंग करने से भी बचें। अपने फेसबुक का पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहे और किसी और के सिस्टम या मोबाइल पर अपना फेसबुक अकाउंट ओपन ना करें।

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