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आएगा खादी का नया दौर: सरकार ने उठाए बड़े कदम, KVIC एक्ट में संशोधन से होगा खादी-ग्रामोद्योग का कायाकल्प

KVIC Act: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार खादी को पुनर्जीवित करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव पेश किया गया है जिससे खादी उत्पादों को अधिक बाजार योग्य बनाया जा सके, युवाओं को आकर्षित किया जा सके और भारतीय पारंपरिक वस्त्रों के निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके। सरकार द्वारा ये संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।

सरकार मौजूदा आपूर्ति श्रृंखला में सुधार करने की योजना बना रही है ताकि खादी उत्पादों का निरंतर और सतत उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके। इससे खादी आउटलेट्स में उत्पादों की कमी की समस्या खत्म होगी और उपभोक्ताओं को बेहतर खरीदारी अनुभव मिलेगा।

KVIC Act

कम कार्बन फुटप्रिंट वाले वस्त्र के रूप में खादी का प्रचार

वैश्विक स्थिरता रुझानों को ध्यान में रखते हुए, खादी को पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ फैशन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। सरकार इसका न्यूनतम कार्बन फुटप्रिंट उजागर कर पर्यावरण के प्रति जागरूक ग्राहकों को आकर्षित करने की योजना बना रही है।

डिजिटलीकरण और बाजार क्षमता में वृद्धि

KVIC पोर्टल को फिर से डिज़ाइन किया जा रहा है ताकि खादी उत्पादों को ऑनलाइन खरीदारी के लिए अधिक सुलभ और आकर्षक बनाया जा सके। इससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर खादी की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और डिजिटल उपस्थिति मजबूत होगी।

युवाओं में खादी को लोकप्रिय बनाना

खादी को फैशन ट्रेंड से जोड़ने के लिए KVIC ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) के साथ समझौता किया है। यह सहयोग बाजार की जरूरतों को समझने और युवाओं की पसंद के अनुसार खादी उत्पादों को डिजाइन करने में मदद करेगा।

खादी के निर्यात को बढ़ावा‌

संशोधन के तहत निर्यात प्रोत्साहन केंद्रों की स्थापना की योजना बनाई गई है, जिससे खादी का वैश्विक विस्तार हो सके। यह कदम भारतीय वस्त्र उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा। प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया और भारतीय उत्पादों को दुनिया भर में पहचान दिलाने में भी आयोग का यह प्रयास मददगार साबित हो सकता है।
खादी को पुनर्जीवित करने के इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं। वित्त वर्ष 2024 में खादी की बिक्री ₹6496 करोड़ तक पहुंच गई जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹5492 करोड़ तक ही पहुंच पाया था। यह उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि और सरकारी पहलों की सफलता को दर्शाता है।

परंपरागत कपड़े को आधुनिक फैशन से जोड़कर, सरकार सुनिश्चित कर रही है कि खादी आज के बाजार में प्रासंगिक बनी रहे। KVIC अधिनियम में संशोधन से न केवल खादी की उपलब्धता और लोकप्रियता बढ़ेगी, बल्कि इसे स्थिरता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी बनाया जाएगा। इन प्रगतिशील कदमों के माध्यम से सरकार खादी को वैश्विक स्तर पर एक पर्यावरण-अनुकूल और प्रतिष्ठित वस्त्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है, जो परंपरा और आधुनिकता के बीच सेतु का काम करेगा।

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