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Cab यूजर्स के लिए अलर्ट! Ola Uber बुक करने से पहले जान लें ये नया नियम, वरना देना पड़ सकता है दुगना किराया

New Cab Fare Rules: अगर आप रोज ऑफिस जाने के लिए Ola, Uber या रैपिडो पर भरोसा करते हैं, तो अब हर सफर में जेब पर थोड़ा और बोझ बढ़ने वाला है। वजह? सरकार ने मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइंस 2025 के तहत ऐप-बेस्ड टैक्सी सेवाओं को पीक ऑवर्स में दोगुना किराया वसूलने की इजाजत दे दी है।

जहां पहले कंपनियां सिर्फ 1.5 गुना तक ही किराया बढ़ा सकती थीं, अब वो बेस फेयर का 2x तक चार्ज कर सकती हैं - यानी वही सफर अब ज़्यादा महंगा हो सकता है, खासकर तब जब सबसे ज़्यादा जरूरत हो!

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सरकार का दावा है कि ये बदलाव ड्राइवरों के हितों की रक्षा, यात्रियों की सुरक्षा और सेवा में पारदर्शिता के मकसद से किया गया है। मगर सवाल ये है - आम मुसाफिर पर इसका असर क्या होगा?

पीक ऑवर्स में कैसे पड़ेगा असर?

पीक ऑवर्स वे समय होते हैं जब सड़कों पर अत्यधिक ट्रैफिक रहता है और टैक्सी की मांग बढ़ जाती है। आमतौर पर यह समय सुबह 8 से 11 बजे और शाम 5 से 9 बजे तक होता है। इसके अलावा बारिश, त्योहारों या किसी बड़े आयोजन के दौरान भी पीक ऑवर्स घोषित किए जा सकते हैं।

नई गाइडलाइंस के अनुसार, इन पीक ऑवर्स के दौरान कैब कंपनियां बेस फेयर का अधिकतम 2 गुना तक शुल्क ले सकती हैं, जो पहले 1.5 गुना तक सीमित था।

वहीं, नॉन-पीक ऑवर्स यानी जब टैक्सी की मांग कम रहती है (जैसे दोपहर या देर रात), उस समय न्यूनतम किराया बेस फेयर का 50% से कम नहीं हो सकता। इसका उद्देश्य ड्राइवरों की आय की एक निश्चित न्यूनतम सीमा सुनिश्चित करना है।

क्या होता है बेस फेयर?

बेस फेयर वह न्यूनतम किराया होता है, जो किसी भी राइड के लिए एक तय दूरी या समय के आधार पर लिया जाता है। यह किराया राज्य सरकारों द्वारा तय किया जाता है, क्योंकि ट्रांसपोर्ट नियम राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। बेस फेयर का निर्धारण शहर, वाहन के प्रकार (जैसे सेडान, हैचबैक, ऑटो, बाइक टैक्सी), और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है।

कैंसिलेशन पर कितना और कैसे लगेगा चार्ज

गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि अब से बिना वैध कारण राइड कैंसिल करने पर ड्राइवर या यूज़र, दोनों पर 10% या ₹100 तक का जुर्माना लगाया जा सकता है (जो भी राशि कम हो)। यह व्यवस्था यात्रियों और ड्राइवरों के समय की कद्र बढ़ाने और फर्जी बुकिंग/कैंसिलेशन को रोकने के उद्देश्य से लाई गई है।

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ड्राइवरों के लिए बीमा और ट्रेनिंग भी जरूरी

ड्राइवरों की सुरक्षा और कल्याण को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने उन्हें अनिवार्य रूप से शामिल किया है:

  • ₹5 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस
  • ₹10 लाख का टर्म इंश्योरेंस
  • हर वर्ष एक बार ट्रेनिंग लेना अनिवार्य

इस पहल का मकसद है कि राइड-शेयरिंग सेवाओं से जुड़े ड्राइवरों को सिर्फ आय का साधन ही न मिले, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाए।

Ola, Uber और रैपिडो जैसी कंपनियों पर क्या होगा असर?

इन नई गाइडलाइंस से ऐप बेस्ड कंपनियों को अधिक लचीलापन (flexibility) मिलेगा, जिससे वे राइड की मांग और आपूर्ति के हिसाब से किराए को समायोजित कर सकेंगी। इससे जहां यात्रियों को पीक टाइम में अधिक भुगतान करना होगा, वहीं ड्राइवरों को अपनी सेवाओं का बेहतर मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

हालांकि, उपभोक्ता संगठनों ने चेतावनी दी है कि बिना मूल्य नियंत्रण के यह किराया वृद्धि गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए समस्या खड़ी कर सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जो रोजाना कैब सेवाओं पर निर्भर हैं।

MVAG 2025 गाइडलाइंस ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट सेवाओं को एक व्यवस्थित ढांचा देने का प्रयास हैं, जो यात्रियों की सुविधा, ड्राइवरों की सुरक्षा और कंपनियों की सेवा गुणवत्ता-तीनों पर ध्यान देती हैं। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकारें इन नियमों को किस तरह अपनाती हैं और लागू करती हैं, क्योंकि अंतिम अधिकार राज्यों के पास ही रहेगा।

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