1945 में प्‍लेन क्रैश में नहीं हुई थी नेताजी की मौत, 45 के बाद तक जिंदा थे नेताजी!

कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़े रहस्य से पर्दा उठाने के लिए शुक्रवार को उनसे जुड़ी 64 फाइलें सार्वजनिक कर दीं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि उन्‍होंने कुछ फाइलें पढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि उन फाइलों के अनुसार 1945 के बाद नेताजी के जिंदा होने की बात सामने आई है।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 11 सितंबर को यह कहते हुए नेताजी से जुड़ी 64 फाइलों को सार्वजनिक करने के अपनी सरकार फैसले की घोषणा की थी कि नेताजी के गायब होने से जुड़े रहस्य से पर्दा उठाए जाने की जरूरत है।

ममता ने कहा है कि हमारे पास जो भी फाइलें हैं, हम उन्हें सार्वजनिक करेंगे, जिससे शायद उस रहस्य को दूर करने में मदद मिले।

हालांकि ममता का यह बयान काफी हैरान करने वाला है क्‍योंकि अभी तक हर कोई इस बात पर ही यकीन करता आया है कि 18 अगस्‍त 1945 को ताइवान में हुए एक प्‍लेन क्रैश में नेताजी की मौत हो गई थी।

इन फाइलों से नेताजी के परिवार की बात भी पता चली है। फाइलों से जो जानकारी मिली है कि उसके मुताबिक इंटेलीजेंस ब्‍यूरो के 14 अधिकारियों ने नेताजी के परिवार की जासूसी की थी।

इन फाइलों से यह भी पता लगता है कि आजादी के बाद भी परिवार की जासूसी जारी थी। वर्ष 1967 तक पश्चिम बंगाल में कांग्रेस का शासन था।

वहीं शुक्रवार को ममता बनर्जी सरकार के इस अहम कदम के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। अब केंद्र सरकार पर उसके पास मौजूद फाइलों को सार्वजनिक करने की जिम्‍मेदारी है।

ममता बनर्जी के मुताबिक अगर केंद्र सरकार के पास कुछ भी छिपाने को नहीं है तो फिर वह इन फाइनों को सार्वजनिक क्‍यों नहीं करती है।

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