Gen-Z Protest से नेपाल में गृहयुद्ध जैसे हालात, भारत ने अपने नागरिकों के लिए जारी की एडवाइजरी

Nepal Gen-Z Protest 2025 Update: नेपाल में सोशल मीडिया बैन से भड़की हिंसा लगातार गहराती जा रही है। सोमवार को हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई में अब तक कम से कम 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं।

विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के बीच सोमवार को प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की। ओली का यह कदम ऐसे समय आया है जब देश में गृहयुद्ध जैसे हालात हो गए हैं। ओली के पद छोड़ने के बाद नेपाल की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई है।

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माना जा रहा है कि अब नए प्रधानमंत्री के चयन के लिए राजनीतिक दलों में जोर-आजमाइश और सियासी सौदेबाजी तेज होगी। 73 वर्षीय ओली ने मंगलवार, 9 सितंबर को घोषणा की थी कि वह व्यक्तिगत रूप से सभी दलों की बैठक की अध्यक्षता करेंगे और हिंसा को "अर्थपूर्ण निष्कर्ष" तक ले जाएंगे। लेकिन इस्तीफे का फैसला नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता और गहरे संकट को उजागर करता है।

इस बीच भारत ने नेपाल की बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने व बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकालने की अपील की है।

India advisory for citizens in Nepal: भारत ने क्या कहा?

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा,"हम नेपाल में कल से बने हालात पर करीबी नजर रखे हुए हैं। कई युवा जीवनों की क्षति से हम गहरा दुखी हैं। हमारी संवेदनाएं मृतकों के परिवारों के साथ हैं और हम घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना करते हैं।"

भारत ने यह भी दोहराया कि नेपाल एक करीबी पड़ोसी और मित्र देश है और सभी पक्षों को शांति और संवाद के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।

काठमांडू में कर्फ्यू

काठमांडू और अन्य शहरों में हालात बिगड़ने के बाद मंगलवार सुबह प्रशासन ने अनिश्चितकालीन कर्फ्यू की घोषणा कर दी। संसद और कलांकी इलाके में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग की। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हालिया वर्षों में नेपाल में नागरिकों पर सबसे घातक कार्रवाई मानी जा रही है।

Nepal government crackdown: सरकार पर नेपाली युवाओं ने क्या आरोप लगाएं?

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार अधिनायकवादी और भ्रष्टाचार से ग्रस्त है। लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया बैन के बहाने सरकार ने नागरिकों की आवाज दबाने की कोशिश की। उनका कहना है कि कल कई छात्रों की जान गई और अब पीएम ओली को देश छोड़ देना चाहिए। छात्रों को लगातार अपनी आवाज उठानी चाहिए।

पूर्व नेपाली सेना कर्नल माधव सुंदर खड़गा ने बताया कि उनका बेटा प्रदर्शन के दौरान लापता हो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों की आवाज दबाने के लिए बेरहमी से बल प्रयोग कर रही है। उन्होंने कहा,"मैंने बेटे को कई बार फोन किया लेकिन शाम 4 बजे के बाद उसका फोन बंद हो गया। पुलिस स्टेशन पहुंचा तो मुझे भी पीटा गया। यह सरकार अब खत्म होनी चाहिए।"

सोमवार रात ही प्रधानमंत्री ओली ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए सोशल मीडिया बैन हटाने का ऐलान किया, लेकिन हिंसा के लिए "विभिन्न स्वार्थी समूहों की घुसपैठ" को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मृतकों के परिवारों को आर्थिक मदद और घायलों के मुफ्त इलाज का आश्वासन दिया। साथ ही हिंसा की जांच के लिए पैनल बनाने की घोषणा भी की।

भारत ने नेपाल में मौजूद अपने नागरिकों से सतर्क रहने और स्थानीय दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। वहीं नेपाल में प्रदर्शनकारी अब भी डटे हुए हैं और साफ कह रहे हैं कि जब तक ओली इस्तीफा नहीं देंगे, आंदोलन जारी रहेगा। कुल मिलाकर, सोशल मीडिया बैन से शुरू हुआ यह विवाद अब नेपाल सरकार के खिलाफ बड़े जनविरोध में बदल चुका है और इसके शांत होने के आसार अभी दूर-दूर तक नहीं दिख रहे।

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