SC/ST के आरक्षण में "क्रीमी लेयर" मानदंड पर बिदके NDA के साथी, रामदास अठालवे ने कह दी बड़ी बात
SC/ST Reservation "Creamy Layer" Criteria: सुप्रीम कोर्ट अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षण में कोटे में कोटा दिए जाने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही इस आरक्षण में "क्रीमी लेयर" मानदंड को शामिल करने को लेकर भी फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अब नई बहस छिड़ चुकी है। भाजपा ने तो चुप्पी साध रखी है लेकिन एनडीए में शामिल साथी ही इस पर नाराज नजर आ रहे हैं। शनिवार को केंद्रीय मंत्री रामदास अठालवे ने SC/ST के आरक्षण में "क्रीमी लेयर" मानदंड को शामिल करने का कड़ा विरोध जता दिया है। इसके साथ ही उन्होंने आरक्षण में कोटे के अंदर कोटा पर बड़ी बात कह डाली है।

सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन का हिस्सा रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के मुखिया अठालवे ने आरक्षण में "क्रीमी लेयर" मानदंड को शामिल किए जाने का विरोध करते हुए कहा अवधारणा केवल अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) पर लागू होती है। उन्होंने कहा "एससी/एसटी के लिए आरक्षण जाति पर आधारित है। इस तरह के किसी भी कदम को हमारी पार्टी दृढ़ता से खारिज करेगी।
जानें क्या है क्रीमी लेयर के मायने?
बता दें क्रीमी लेयर के मायने आरक्षण के अंतर्गत आने वाली श्रेणियों के व्यक्तियों के के ऐसे वर्ग से जो सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहतर हैं। जैसा कि अठावले ने कहा वर्तमान समय में ये क्रीमी लेयर की अवधारणा केवल ओबीसी आरक्षण पर लागू है। दरअसल, क्या आरक्षित श्रेणियों के भीतर आर्थिक रूप से बेहतर व्यक्तियों को लाभ मिलना जारी रहना चाहिए। ये बहस सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार को दिए गए फैसले पर आया है।
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
बता दें शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने हाल ही में फैसला सुनाया कि राज्य एससी और एसटी को उप-वर्गीकृत (sub-classified) कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की सात में से छह न्यायाधीशों द्वारा समर्थित इस फैसले का उद्देश्य इन समूहों के भीतर अधिक पिछड़ी जातियों तक कोटा पहुंचाना सुनिश्चित करना है। वहीं चार न्यायाधीशों ने अपने फैसले में क्रीमी लेयर को आरक्षण लाभ से बाहर रखने का सुझाव दिया।
कोटे में कोटा दिए जाने पर क्या बोले अठालवे?
हालांकि अठालवे ने कोटे में कोटा दिए जाने का समर्थन किया है लेकिन एससी, एसटी में क्रीमी लेयर को आरक्षण से वंचित किए जाने की खिलाफत की है। अठावले ने माना कि इससे एससी/एसटी समूहों में पिछड़ी जातियों को न्याय पाने में मदद मिलेगी। उन्होंने लाभों के उचित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए ओबीसी और सामान्य श्रेणी के लिए भी इसी तरह के उप-वर्गीकृत (sub-classified) की मांग की।
अठालवे ने अयोग बनाकर अध्यन करने की दी सलाह
अठावले ने बताया कि भारत में 1,200 अनुसूचित जातियां हैं, जिनमें अकेले महाराष्ट्र में ही 59 में हैं। उन्होंने सलाह दी कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र को इन जातियों का अध्ययन करने और उन्हें ए, बी, सी और डी श्रेणियों में उप-वर्गीकृत करने के लिए एक आयोग की स्थापना करनी चाहिए। यह कदम एससी श्रेणी के भीतर न्यायसंगत न्याय सुनिश्चित करेगा।
चिराग पासवान का कानूनी कदम
चिराग पासवान एससी/एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर को शामिल करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं। यह कानूनी कार्रवाई आरक्षण नीतियों में बदलाव को लेकर राजनीतिक नेताओं के बीच चल रहे प्रतिरोध को दर्शाती है।
चंद्रशेखर आजाद ने भी जताया विरोध
लोकसभा सांसद और आजाद समाज पार्टी प्रमख चंद्रशेखर आजाद ने भी इस पर विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि जिन जजों की बेंच ने यह फैसला दिया है उसमे से कितने जज एससी-एसटी हैं। अगर आप वर्गीकरण करना चाह रहे हैं तो इसकी शुरुआत देश की सर्वोच्च संस्था सुप्रीम कोर्ट से होनी चाहिए।












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