शिवसेना छोड़ने एनसीपी में शामिल हुए नेता ने कहा, 'PM के लिए शरद पवार के अलावा विकल्प नहीं'

मुंबई। अभिनेता अमोल कोल्हे ने मंगलवार को भोसरी में एक सार्वजनिक रैली में कहा कि देश एक बदलाव के कगार पर है और एनसीपी प्रमुख शरद पवार जैसे एक मराठी व्यक्ति के हाथों को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके अलावा कोल्ह ने कहा कि शरद पवार वो नेता हैं जो देश का प्रधानमंत्री बन सकते हैं। शिवसेना छोड़ने और पिछले हफ्ते एनसीपी में शामिल होने के बाद अपनी पहली रैली को संबोधित करते हुए कोल्हे ने कहा कि परिवर्तन अपरिहार्य है।

देश 2019 के बाद केंद्र में बदलाव का गवाह बनेगा

देश 2019 के बाद केंद्र में बदलाव का गवाह बनेगा

अमोल कोल्हे ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि देश 2019 के बाद केंद्र में बदलाव का गवाह बनेगा। देश एक बदलाव के कगार पर है इसलिए पवार साहेब के हाथओं को मजबूत करना होगा जो अगले प्रधानमंत्री होंगे। आपको बता दें कि कोल्हे मराठी टीवी धारावाहिक संभाजी में मुख्य भूमिका निभाते हैं और अपने कौशल के लिए जाने जाते हैं। कोल्हे की इस भोसरी की रैली में बड़ा बदलाव भी देखा गया। क्योंकि इस बार की रैली में कोल्हे ने बिना पर्ची पढ़े ही कई नेताओं के नाम लिए और भीड़ से वाहवाही लूटी।

पीएम के लिए शरद पवार के आलावा कोई विकल्प नहीं है

पीएम के लिए शरद पवार के आलावा कोई विकल्प नहीं है

रैली को संबोधित करते हुए कोल्हे ने कहा कि फिलहाल पीएम के लिए शरद पवार के आलावा कोई विकल्प नहीं है। इस दौरान पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कोल्हे ने कहा कि जो लोग 56 इंच की छाती की बात करते रहे हैं, और देश चलाने की बात करते हैं उन्होंने तो हमारे सारे सपने चकनाचूर कर दिए हैं। उन्होंने जो वादे किए थे सब धरे के धरे रह गए। उनसा समय अब समाप्त हो गया है। 2019 के चुनाव में वोटरों से झूठ बोलने वालों का पतन होगा।

लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचला जा रहा

लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचला जा रहा

कोल्हे ने कहा कि छत्रपति शिवाजी ने लोकतंत्र को महत्व दिया और इसके लिए अथक रूप से काम किया, लेकिन वर्तमान शासन में, सभी लोकतांत्रिक मानदंडों को किनारे कर दिया गया है, तानाशाही के रास्ते पर जा रहे हैं, भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को कुचलने का काम कर रहे हैं। कोल्हे ने कहा कि जब 2016 में नोटबंदी हुई थी तो राष्ट्र को बताया गया था कि आतंकी फंडिंद बंद हो जाएगी और आतंकी गतिविधियों में कमी आएगी। लेकिन पिछले तीन साल में 450 सैनिक मारे गए और आतंकी गतिविधिया बेरोकटोक जारी हैं।

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