किसान आंदोलन को समर्थन देकर विवादों में आए शरद पवार, अब पार्टी की तरफ से दी गई सफाई
मुंबई। किसान आंदोलन के समर्थन में देश की 18 विपक्षी पार्टियां आगे आ गई हैं। रविवार को कांग्रेस समेत देश की 18 विपक्षी पार्टियों ने किसानों के 'भारत बंद' का समर्थन करने का ऐलान कर दिया। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) भी शामिल है। NCP के किसानों के आंदोलन को समर्थन देने के बाद से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, एक वक्त था जब शरद पवार ने खुद कृषि मंत्री रहते हुए कृषि उत्पाद विपणन समिति (APMC) में संशोधन की मांग की थी और आज शरद पवार उस संशोधन का विरोध कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर शरद पवार के द्वारा लिखी गई एक चिट्ठी भी वायरल हो रही थी, जो उन्होंने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लिखी थी। हालांकि इस चिट्ठी को लेकर अब NCP की तरफ से सफाई है।

शरद पवार के विवाद में आने पर NCP की सफाई
NCP की तरफ से सफाई में कहा है कि मॉडल एपीएमसी कानून (APMC ACT 2003) अटल बिहार वाजपेयी जी की सरकार में लाया गया था। उस वक्त कई राज्य इस कानून का विरोध कर रहे थे। ऐसे में बतौर कृषि मंत्री रहते हुए शरद पवार ने राज्य कृषि विपणन बोर्ड से सुझाव मंगाकर उनके बीच इस कानून पर एक आम सहमति बनाने की कोशिश थी। इस कोशिश के तहत राज्य सरकारों को APMC एक्ट से किसानों को होने वाले फायदे के बारे में बताया गया था, जिसके बाद कई राज्य इसे लागू करने पर राजी हुए थे।
शरद पवार ने शीला दीक्षित को लिखी चिट्ठी में क्या कहा था?
आपको बता दें कि शरद पवार ने साल 2010 में कृषि मंत्री रहते हुए दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लिखे पत्र में कहा था कि कृषि सेक्टर को फायदा पहुंचाने के लिए अच्छी तरह से संचालित होने वाले बाजारों की जरूरत होगी और इसके लिए APMC कानून में संशोधन करना होगा। इससे देश के ग्रामीण इलाकों में विकास, रोजगार और आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। राज्य APMC कानून में संशोधन की अपेक्षा जताते हुए उन्होंने पत्र में लिखा, 'इसके लिए कोल्ड स्टोरेज समेत विपणन ढांचे में बड़े निवेश की जरूरत होगी। इसके लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी जरूरी है जिसके लिए एक उचित नियामक तथा नीतिगत माहौल चाहिए होगा।'












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