वेदांता को बड़ा झटका: जयप्रकाश एसोसिएट्स की जंग में अदाणी की जीत पक्की

कर्ज के बोझ तले दबी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में वेदांता लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है। नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने सोमवार को वेदांता की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें अदाणी एंटरप्राइजेज के रेजोल्यूशन प्लान को चुनने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

NCLAT backs Adani bid for Jaiprakash

चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण और तकनीकी सदस्य बरुण मित्रा की दो सदस्यीय बेंच ने अपने फैसले में कहा कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के पुराने आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं है। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने माना कि वेदांता की अपीलों में कोई दम नहीं है, जिसके बाद बिना किसी अतिरिक्त आदेश के दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।

NCLAT ने अपने फैसले में इस बात पर जोर दिया कि कर्जदाताओं की समिति (CoC) ने रेजोल्यूशन प्लान चुनते समय अपनी "व्यावसायिक सूझबूझ" (commercial wisdom) का इस्तेमाल किया है। ट्रिब्यूनल ने यह भी साफ किया कि रेजोल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा अपनाई गई दिवाला प्रक्रिया (insolvency process) में किसी भी तरह की बड़ी अनियमितता नहीं पाई गई है।

वेदांता ने कर्जदाताओं द्वारा अपनाए गए मूल्यांकन के तरीकों पर सवाल उठाए थे। कंपनी का तर्क था कि उसकी बोली अदाणी एंटरप्राइजेज की तुलना में काफी बेहतर थी—ग्रॉस वैल्यू में करीब 3,400 करोड़ रुपये और नेट प्रेजेंट वैल्यू में लगभग 500 करोड़ रुपये ज्यादा। हालांकि, ट्रिब्यूनल ने इस दलील को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि भले ही वेदांता की वित्तीय पेशकश ज्यादा थी, लेकिन अदाणी की बोली को प्राथमिकता देने के CoC के फैसले को मनमाना या गलत नहीं ठहराया जा सकता।

यह पूरा विवाद 17 मार्च से शुरू हुआ था, जब NCLT की इलाहाबाद बेंच ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज के 14,535 करोड़ रुपये के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। वेदांता ने इस फैसले को NCLAT में चुनौती दी। इससे पहले 24 मार्च को अपीलेट ट्रिब्यूनल ने NCLT के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, हालांकि यह जरूर कहा था कि पूरी प्रक्रिया अपीलों के अंतिम नतीजे पर निर्भर करेगी।

वेदांता ने राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी प्रक्रिया पर रोक लगाने से मना कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने निर्देश दिया था कि मॉनिटरिंग कमेटी द्वारा लिया गया कोई भी बड़ा नीतिगत फैसला ट्रिब्यूनल की पूर्व मंजूरी के बाद ही लागू होगा।

बिडिंग प्रोसेस के दौरान अदाणी एंटरप्राइजेज को कर्जदाताओं का सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। कंपनी को 89 प्रतिशत वोट मिले, जबकि डालमिया भारत और वेदांता पीछे रह गए। CoC का कहना था कि चयन प्रक्रिया में इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के सभी नियमों का पालन किया गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि बोलियों का आकलन सिर्फ कुल रकम के आधार पर नहीं, बल्कि अपफ्रंट कैश, काम करने की क्षमता और उसे लागू करने के प्लान जैसे कई पैमानों पर किया जाता है।

जून 2024 में दिवाला प्रक्रिया (CIRP) में शामिल की गई जयप्रकाश एसोसिएट्स पर कुल 57,185 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग, हॉस्पिटैलिटी, पावर और इंजीनियरिंग जैसे कई क्षेत्रों में संपत्तियां मौजूद हैं।

कंपनी की मुख्य रियल एस्टेट संपत्तियों में ग्रेटर नोएडा का जेपी ग्रीन्स, नोएडा का जेपी ग्रीन्स विशटाउन और जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास स्थित जेपी इंटरनेशनल स्पोर्ट्स सिटी शामिल हैं। इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर में कमर्शियल ऑफिस स्पेस, उत्तर भारत में कई होटल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में चार सीमेंट प्लांट और लीज पर ली गई चूना पत्थर की खदानें भी कंपनी के पास हैं।

इतना ही नहीं, जयप्रकाश एसोसिएट्स ने जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड, यमुना एक्सप्रेसवे टोलिंग लिमिटेड और जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट लिमिटेड जैसी कई सहायक कंपनियों में भी निवेश किया हुआ है।

NCLAT के इस ताजा फैसले के बाद अदाणी एंटरप्राइजेज द्वारा जयप्रकाश एसोसिएट्स के अधिग्रहण का रास्ता लगभग साफ हो गया है। भारत के हाई-प्रोफाइल दिवाला मामलों में इसे एक बड़ी प्रगति के रूप में देखा जा रहा है।

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