पानी में दुश्मनों पर वज्र बनकर टूटेगा नेवी का आईएनएस वज्रकोष
कारवार। इंडियन नेवी के बेड़े में बुधवार को एक और सितारा जुड़ गया। आईएनएस वज्रकोष को कर्नाटक के कारवार में रक्षा मंत्री ने इंडियन नेवी के हवाले कर दिया। आईएनएस वज्रकोष में इंस्टॉल मिसाइलें हर पल दुश्मन के लिए तैयार रहेंगी। अगर दुश्मन ने वेस्टर्न कोस्ट से दाखिल होने की कोशिश की तो फिर उसकी खैर नहीं होगी।
इंडियन नेवी का कहना है कि आईएनएस वज्रकोष को इंडियन नेवी में कमीशन होना इसकी आक्रामक और रक्षात्मक ताकत को दोगुना कर देता है। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने आईएनएस वज्रकोष को भारतीय तटीय सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम करार दिया।
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पूरी होंगी नेवी की सभी जरूरतें
नेवी के प्रवक्ता कैप्टन डीके शर्मा ने बताया है कि कारवार में नेवी की जितनी भी यूनिट्स हैं उन्हें खास तरह के हथियारों और मिसाइलों से लैस करने की जरूरत है। इन यूनिट्स के पास खास तरह की स्टोरेज और सर्विसिंग फैसेलिटीज का होना काफी जरूरी था। आईएनएस वज्रकोष उन्हीं जरूरतों को पूरा करता है।
क्यों खास है आईएनएस वज्रकोष
- आईएनएस वज्रकोष के नेवी में कमीशन होने के बाद कर्नाटक का कारवार नेवी का एक अहम बेस बनने की ओर है।
- रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने भी आईएनएस वज्रकोष को भारत की मैरीटाइम सुरक्षा के लिए एक अहम हिस्सा बताया है।
- आईएनएस वज्रकोष कई तरह के आधुनिक हथियारों को आसानी से स्टोर कर सकता है।
- अगर कोई तकनीकी खराबी आ जाए तो उसे भी तुरंत दूर कर किसी मिशन को अंजाम दिया जा सकता है।
- रक्षा मंत्री की मानें तो आईएनएस वज्रकोष जटिल और आधुनिक परियोजना की सफलता की मिसाल है।
- क्रू को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि इसमें इंस्टॉल मिसाइल ऑपरेशनल डेप्लॉयमेंट के लिए हर पल तैयार रहें।
- आईएनएस कारवार अब दुनिया के कुछ सबसे बड़े नेवी बेस में शामिल हो गया है।
- अब कारवार वेस्टर्न कोस्ट में नेवी के लिए एक ताकवर बेस के तौर पर विकसित हो रहा है।
- इंडियन नेवी का कारवार बेस 25,000 करोड़ की लागत से और आधुनिक बनेगा।
मछुआरों का सम्मान
आईएनएस वज्रकोष की कमीशनिंग सेरेमनी के दौरान ही रक्षा मंत्री को आईएनएस तेज में मिसाइल लोड करने की प्रक्रिया को भी दिखाया गया। इसके अलावा उन्होंने कारवार में आधुनिक शिप लिफ्ट फैसेलिटी और वॉरशिप्स की मरम्मत की
सुविधाओं को भी परखा। इसके अलावा रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने गोवा में क्रैश हुए नेवी के एयरक्राफ्ट डॉर्नियर के पायलट की जान बचाने वाले मछुआरों को भी सम्मानित किया। यह हादसा 24 मार्च 2015 को हुआ था।













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