निरोगी होना है तो पूजिये मां के पाचवें रूप स्कंदमाता को

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
तीनों लोक के स्वामी भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र कार्तिक को भगवान स्कंद भी कहा जाता है। इसलिए भगवान स्कंद की माता होने के कारण माँ दुर्गाजी के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं।
इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। सिंह भी इनका वाहन है। नवदुर्गा के पांचवे स्वरूप स्कंदमाता की अलसी औषधी के रूप में भी पूजा होती है। स्कंद माता को पार्वती एवं उमा के नाम से भी जाना जाता है। अलसी एक औषधि से जिससे वात, पित्त, कफ जैसी मौसमी रोग का इलाज होता है।
कहते हैं राजधानी दिल्ली पटपडग़ंज स्थित मधु विहार के हिंगलाज मंदिर में मां स्कंदमाता का सबसे पौराणिक मंदिर है, इसलिए आज यानी नवरात्र के पांचवे दिन यहां भक्तों का तांता सुबह से लग जाता है। इसलिए अगर आपको भी निरोग और स्वस्थ रहना है तो जरूर कीजिये आज मां स्कंदमाता का दर्शन।












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