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National Voters' Day 2026: 25 जनवरी को ही क्यों मनाते हैं नेशनल वोटर्स डे? वो फैसले जिन्होंने भारत को बदला

National Voters' Day 2026: भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में हर एक नागरिक की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए हर साल 25 जनवरी को 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' (National Voters' Day) पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह दिन न केवल विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की शक्ति का उत्सव है, बल्कि भारतीय निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस का प्रतीक भी है।

25 जनवरी 1950 को निर्वाचन आयोग वजूद में आया था, जिसके सम्मान में साल 2011 से इस दिवस को मनाने की शुरुआत हुई। इसका मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाना और विशेष रूप से युवाओं को मतदान के प्रति जागरूक करना है।

National Voters Day 2026

इस वर्ष हम 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस मना रहे हैं। जो हमें याद दिलाता है कि हमारा एक वोट केवल एक ठप्पा नहीं, बल्कि देश के भविष्य और विकास की दिशा तय करने वाला सबसे शक्तिशाली हथियार है।

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25 जनवरी ही क्यों? जानें इसकी ऐतिहासिक महत्ता

राष्ट्रीय मतदाता दिवस के लिए 25 जनवरी की तारीख का चुनाव बेहद खास है। भारतीय संविधान के लागू होने से ठीक एक दिन पहले, यानी 25 जनवरी 1950 को भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) की स्थापना की गई थी।

केंद्र सरकार ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के लिए साल 2011 में इस गौरवशाली दिन को 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' घोषित किया। तब से लेकर आज तक, यह दिन नए मतदाताओं के पंजीकरण और चुनावी साक्षरता के लिए एक बड़े अभियान के रूप में मनाया जाता है।

वोटिंग की उम्र, 21 से 18 साल तक का सफर

भारत में मतदान के अधिकार को लेकर एक बड़ा संवैधानिक बदलाव 1988 में हुआ था। इससे पहले वोट देने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष थी। युवाओं की राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए 61वें संविधान संशोधन के जरिए इसे घटाकर 18 वर्ष कर दिया गया। इस ऐतिहासिक फैसले ने करोड़ों युवाओं को देश की सत्ता चुनने में सीधे तौर पर शामिल होने का मौका दिया।

निर्वाचन आयोग की भूमिका और जिम्मेदारियां

भारत निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है, जिस पर देश में निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी है। आयोग के मुख्य कार्यों में शामिल हैं:

  • मतदाता सूची तैयार करना: नए मतदाताओं को जोड़ना और पारदर्शी सूची बनाना।
  • स्वतंत्र चुनाव: बिना किसी दबाव के चुनाव प्रक्रिया को संपन्न कराना।
  • जागरूकता अभियान: मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए लोगों को प्रेरित करना।
  • सुधार: चुनाव प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक (जैसे EVM और VVPAT) का उपयोग करना।

मतदान क्यों जरूरी है?

लोकतंत्र का अर्थ है 'जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा शासन'। ऐसे में वोट देना न केवल हमारा संवैधानिक अधिकार है, बल्कि एक नागरिक के रूप में बड़ी जिम्मेदारी भी है।

  • सही प्रतिनिधि का चुनाव: वोट के जरिए ही हम ऐसे नेता चुन सकते हैं जो विकास और जनहित के मुद्दों पर काम करें।
  • जवाबदेही: मतदान के माध्यम से जनता सरकार को उसकी नीतियों के प्रति जवाबदेह बनाती है।
  • राष्ट्र निर्माण: जब हर नागरिक मतदान करता है, तभी देश की आवाज सही मायनों में संसद तक पहुँचती है।

राष्ट्रीय मतदाता दिवस के प्रमुख उद्देश्य

इस विशेष दिन के जरिए सरकार और निर्वाचन आयोग का लक्ष्य स्पष्ट है:

  • पात्र नागरिकों को मतदाता बनने के लिए प्रेरित करना और उन्हें EPIC (Voter ID Card) सौंपना।
  • चुनावी प्रक्रिया के दौरान 'नैतिक मतदान' (Ethical Voting) को बढ़ावा देना।
  • स्कूलों और कॉलेजों में शपथ समारोह और प्रतियोगिताओं के जरिए युवाओं को जोड़ना।
  • समाज के हर वर्ग को मतदान केंद्र तक लाने के लिए सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करना।

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