Bihar News: ग्रामीण सड़कों के टेंडर में नेशनल बिडिंग — स्थानीय संवेदकों को मिलेगा नया अवसर

बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग ने ग्रामीण सड़कों और पुलों के लिए एक राष्ट्रीय निविदा पहल की घोषणा की है, जो स्थानीय रोजगार के अवसरों और परियोजना की गुणवत्ता को बढ़ाती है। इस नए दृष्टिकोण का उद्देश्य बोली प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

ग्रामीण कार्य विभाग ने राज्य की ग्रामीण सड़क और पुल योजनाओं को मजबूती देने के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है। विभाग ने ग्लोबल टेंडर नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर की निविदा आमंत्रित की है। इससे न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी बल्कि स्थानीय संवेदकों और कामगारों को भी अधिक रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे।

Bihar Initiates National Tenders for Rural Projects

ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने सूचना भवन स्थित सभागार में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि कुछ लोग भ्रम फैला रहे हैं कि बड़े-बड़े पैकेज बनाए गये हैं और छोटे ठेकेदारों को मौका नहीं मिलेगा लेकिन हकीकत ये है कि छोटे-छोटे पैकेज बनाए गये हैं ताकि स्थानीय संवेदकों को लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इस फैसले से न सिर्फ काम की गुणवत्ता बढ़ी है बल्कि 816.68 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इसके साथ ही विभागीय मंत्री ने कहा कि पथवार निविदा प्रणाली को समाप्त कर प्रखंडवार पैकेज नीति लागू की गई है। इससे निविदा प्रक्रिया में तेजी आयी है और कार्य आवंटन में पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है। ग्रामीण सड़क सुदृढीकरण एवं प्रबंधन कार्यक्रम के तहत वर्ष 2024-25 में 14036 पथ, जिनकी लंबाई लगभग 24,480 किमी है, उसकी स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 4079 पथ, जिनकी लंबाई लगभग 6484 किमी है, उसे भी मंजूरी दी गई है।

विभिन्न योजनाओं के तहत अब तक कुल 1038 पैकेजों का कार्य आवंटित किया जा चुका है, जिसमें 657 पैकेज मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़क उन्नयन योजना (एमएमजीएसयूवाई), 169 पैकेज मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) और 212 पैकेज मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना के तहत हैं। यह प्रखंडवार पैकेज तैयार कर निविदा आमंत्रित करने के कारण ही संभव हो पाया है। अगर ये निविदाएं पथवार होती तो आवंटन में आठ महीने तक का समय लग सकता था जबकि प्रखंडवार पैकेज से यही कार्य सिर्फ साढ़े तीन महीने में पूरा हो गए।

इसके साथ ही मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि पैकेज नीति और नेशनल बिडिंग के फैसले के चलते राज्य के अधिकतर जिलों से पंजीकृत संवेदकों ने ही कार्य प्राप्त किया है। बिहार के बाहर झारखण्ड की 2 से 3 और उत्तर प्रदेश की 1 या 2 कंपनियों को कांट्रैक्ट मिला है। मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता और स्थायित्व बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने मेंटेनेंस पॉलिसी को प्रभावी रूप से लागू किया है। स्वीकृत पथों का सात वर्षों तक अनुरक्षण अनिवार्य किया गया है। पांचवें वर्ष में फिर कालीकरण किया जाएगा। इसके तहत लगभग 70 से 75 प्रतिशत राशि पहले साल में और 25 से 30 प्रतिशत राशि अगले सात वर्षों तक खर्च होगी।

निविदा प्रक्रिया को सरल, डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए सीएमबीडी (कंबाइंड मॉडल बिडिंग डॉक्यूमेंट) लागू किया गया है। इसके तहत कोई हार्ड कॉपी निविदाकारों को कार्यालय में जमा नहीं किए जाने का प्रावधान किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

रैपिड रिस्पॉन्स व्हिकल अनिवार्य

संवेदकों के लिए रैपिड रिस्पॉन्स व्हिकल रखना अनिवार्य किया गया है ताकि सड़क में किसी भी प्रकार की खराबी को निर्धारित समय में दुरुस्त किया जा सके। इससे जनता को लगातार बेहतर गुणवत्ता वाली सड़क उपलब्ध रहेगी।

मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना फिर से शुरू

बड़ी बात ये है कि नौ वर्षों के अंतराल के बाद मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना को फिर से शुरू किया गया है। इसके तहत अबतक लगभग 704 पुलों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है और 260 पुलों के निर्माण की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। इससे गांवों से शहर, स्कूल, अस्पताल और बाजार तक सीधी पहुंच संभव हो सकेगी। इस प्रेस कांफ्रेंस में ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी के साथ अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, सचिव एन. सरवण कुमार, विशेष सचिव उज्ज्वल कुमार सिंह, अभियंता प्रमुख निर्मल कुमार और सुल्तान अहमद के साथ कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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